लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी डिबेट का प्रमुख चेहरा रहे सैयद असीम वकार के कांग्रेस में शामिल होने की मजबूत संभावनाएं जताई जा रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे नई दिल्ली में कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। यद्यपि वकार अथवा कांग्रेस की ओर से अभी तक इस खबर की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है, फिर भी यदि ऐसा होता है तो इसे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
प्रदेश संगठन से असंतोष और इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, असीम वकार पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश AIMIM की राज्य इकाई द्वारा लिए जा रहे कुछ नीतिगत निर्णयों से असहमत चल रहे थे। ओवैसी की पार्टी में शामिल होने से पूर्व वकार लगभग दो दशकों तक समाजवादी पार्टी (SP) से जुड़े रहे हैं, जिसके कारण उन्हें प्रदेश की जमीनी राजनीति का लंबा अनुभव है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि वकार को कांग्रेस के पाले में लाने में पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
AIMIM की चुनावी रणनीति और 'वोटकटवा' की छवि पर असर
असीम वकार के संभावित पाला बदलने की खबरें ऐसे वक्त में आई हैं जब ओवैसी अपनी पार्टी को केवल 'वोटकटवा' के तमगे से निकालकर एक स्वतंत्र विकल्प के रूप में स्थापित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। उत्तर प्रदेश में AIMIM के मुख्य प्रवक्ता का चुनाव से ठीक पहले साथ छोड़ना पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी एजेंडे के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
मुस्लिम वोट बैंक को साधने की होड़
उत्तर प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसी वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस, सपा और AIMIM के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला देखा जा रहा है। ऐसे समय में यदि वकार जैसा स्थापित चेहरा कांग्रेस के साथ जुड़ता है, तो कांग्रेस को प्रदेश के अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का एक नया अवसर मिल सकता है।































