
बलरामपुर के पूर्व विधायक और पुरनिया तालाब निवासी अशफाक अहमद का गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक छा गया। उनके जाने को बलरामपुर की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति बताया जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और दुख जताया। अशफाक अहमद का राजनीतिक सफर बलरामपुर की राजनीति में खास जगह रखता है। साल 1977 में उन्होंने बलरामपुर सदर विधानसभा सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेता मान बहादुर सिंह को करीब 3,200 वोटों से हराया था और विधायक बने थे। उस समय जनसंघ के समर्थन के साथ जनता पार्टी के टिकट पर उनकी जीत को क्षेत्र की राजनीति में एक खास घटना माना गया था। उनका 1977 का चुनाव हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल के तौर पर भी याद किया जाता है। उन्होंने अलग-अलग वर्गों के लोगों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी और जनसंपर्क को अपनी राजनीति का खास आधार बनाया। साल 1980 में उन्होंने एक बार फिर बलरामपुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार वे कांग्रेस के मान बहादुर सिंह से करीब 1,100 वोटों से हार गए। चुनावी रिकॉर्ड में उन्हें इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में भी दर्ज किया गया है। बाद के राजनीतिक जीवन में अशफाक अहमद कांग्रेस से भी जुड़े रहे। फरवरी 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। उनकी राजनीतिक यात्रा में अलग-अलग दलों से जुड़ाव रहा, लेकिन क्षेत्र में उनके जनसंपर्क और सामाजिक संबंधों की चर्चा हमेशा होती रही। अशफाक अहमद की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही, जिन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनता के बीच सक्रिय संपर्क बनाए रखा। 1977 की ऐतिहासिक जीत और सामाजिक सौहार्द की राजनीति उनकी राजनीतिक विरासत का खास हिस्सा रहेगी।
































