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नहर किनारे गिरे सागौन पेड़ों पर चोरों ने फेरा आरा:कीमती लकड़ी रातों-रात गायब, वन विभाग ने सिंचाई विभाग से मांगा जवाब

नहर किनारे गिरे सागौन पेड़ों पर चोरों ने फेरा आरा:कीमती लकड़ी रातों-रात गायब, वन विभाग ने सिंचाई विभाग से मांगा जवाब

भवानीगंज थाना क्षेत्र में सागौन की कीमती लकड़ियों के अवैध कटान का सनसनीखेज मामला सामने आया है। तेज आंधी और बारिश में नहर किनारे गिरे सागौन के दर्जनों पेड़ों को माफिया ने रातों-रात काटकर ठिकाने लगा दिया। इस पूरे खेल में सिंचाई विभाग के एक कर्मी की संलिप्तता संदिग्ध बताई जा रही है। मामले का खुलासा होने के बाद वन विभाग हरकत में आया है और सिंचाई विभाग को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों आई तेज आंधी-पानी और गरज-चमक के साथ हुई बारिश से भड़रिया से लेकर बढ़नीचाफा तक शारदा सहायक नहर की पटरी पर लगे कई विशालकाय और दशकों पुराने सागौन के पेड़ जड़ सहित गिर गए थे। ये सभी पेड़ सिंचाई विभाग की भूमि पर स्थित थे और काफी कीमती माने जाते हैं। नियमानुसार, गिरे हुए पेड़ों की सूचना वन विभाग को देकर नीलामी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी, लेकिन विभागीय अनदेखी के चलते ऐसा नहीं हुआ। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर लकड़ी माफिया सक्रिय हो गया। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से रात के अंधेरे से लेकर सुबह भोर तक गिरे हुए पेड़ों पर आरा चलाया गया। कई दिनों तक चोरी-छिपे कटान होता रहा और संबंधित विभाग को भनक तक नहीं लगी। जब ग्रामीणों की नजर कटी हुई लकड़ियों के बोटों और ठूंठों पर पड़ी, तब मामले का पर्दाफाश हुआ। जांच-पड़ताल में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। नहर किनारे गिरी सागौन की लकड़ी बड़ी मात्रा में नहर विभाग में तैनात एक कर्मी के घर पर पड़ी मिली है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी कर्मी की मिलीभगत से लकड़ियों का बंदरबांट किया गया है। हालांकि विभाग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी का नाम नहीं बताया है। क्षेत्रीय वन अधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि बिना परमिट के आरक्षित प्रजाति सागौन की लकड़ी काटना वन अपराध की श्रेणी में आता है। यह वन संरक्षण अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। वन विभाग ने पूछा है कि पेड़ों के गिरने के बाद वन विभाग को सूचना क्यों नहीं दी गई और बिना अनुमति कटान कैसे हुआ।

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