
लखनऊ। दवाओं का ओवरडोज एक बड़ी आकस्मिकता हो सकती है,इस पर जागरूकता आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 25वां ओवरडोज जागरूकता दिवस 31 अगस्त को मनाया जाएगा। इस वर्ष इस दिवस की 25वीं वर्षगांठ है। ये जानकारी फार्मेसिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष, पूर्व चेयरमैन स्टेट फार्मेसी काउंसिल सुनील यादव ने दी। इस वर्ष की थीम 25 साल बाद भी ज़रूरत है। वर्ष बाद भी इसकी आवश्यकता बनी हुई है” इसके महत्व और जागरूकता की आवश्यकता को दर्शाता है। इस अवसर पर फार्मेसिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष, पूर्व चेयरमैन स्टेट फार्मेसी काउंसिल सुनील यादव ने आमजन, स्वास्थ्यकर्मियों और विशेष रूप से फार्मासिस्टों से दवाओं के ओवरडोज से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है। सुनील यादव ने कहा कि ओवरडोज़ को केवल नशीले पदार्थों के सेवन से जोड़कर देखना उचित नहीं है। चिकित्सकीय दवाओं की गलत मात्रा, एक से अधिक दवाओं का असावधानीपूर्वक सेवन, दवाओं के बीच हानिकारक पारस्परिक प्रभाव, एक ही औषधीय घटक वाली अलग-अलग दवाओं का दोहराव, बच्चों द्वारा गलती से दवा खा लेना तथा बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा की मात्रा बढ़ा देना भी गंभीर विषाक्तता और ओवरडोज़ का कारण बन सकता है।उन्होंने कहा कि “एक दवा सही व्यक्ति को, सही मात्रा में और सही तरीके से दी जाए तो जीवनरक्षक हो सकती है, लेकिन वही दवा गलत मात्रा या गलत तरीके से ली जाए तो जीवन के लिए खतरा बन सकती है।” दवाओं की सुरक्षा के प्रति परिवार भी रहें सजग उन्होंने प्रत्येक परिवार से अपने घर में रखी दवाओं की समय-समय पर समीक्षा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि परिवार के प्रत्येक सदस्य को यह जानकारी होनी चाहिए कि कौन-सी दवा किस व्यक्ति के लिए है, उसकी मात्रा कितनी है, दिन में कितनी बार लेनी है तथा उसे कितने समय तक लेना है।विशेष रूप से बच्चों की पहुंच से दवाओं को दूर रखने, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा की मात्रा में परिवर्तन न करने तथा अलग-अलग चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाओं के बारे में चिकित्सक अथवा फार्मासिस्ट को पूरी जानकारी देने की आवश्यकता है। “बहुत नशा है, सोने दो ”—यह सोच खतरनाक हो सकती है सुनील यादव ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के अत्यधिक दवा अथवा नशीले पदार्थ के सेवन की आशंका हो और वह बेहोश हो अथवा सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो उसे केवल नशे में समझकर सोने के लिए छोड़ देना खतरनाक हो सकता है।ऐसी स्थिति को चिकित्सकीय आपातस्थिति मानते हुए तत्काल आपात चिकित्सा सहायता प्राप्त करनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता एवं हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) दिया जाना चाहिए। कुछ विशेष परिस्थितियों में, विशेषकर अफीम वर्ग की औषधियों के अत्यधिक सेवन में, नालोक्सोन जीवनरक्षक औषधि के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ओवरडोज की रोकथाम में फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका सुनील यादव ने कहा कि फार्मासिस्ट की भूमिका केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। फार्मासिस्ट को यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए कि रोगी सही दवा, सही मात्रा और सही तरीके से ले रहा है।उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट को रोगी से यह भी पूछना चाहिए कि वह पहले से कौन-कौन सी दवाएं ले रहा है, कहीं एक ही औषधीय घटक वाली दो दवाएं तो नहीं चल रही हैं तथा दूसरी दवाओं के साथ किसी हानिकारक पारस्परिक प्रभाव की संभावना तो नहीं है। औषधि सुरक्षा और औषधि निगरानी को मजबूत करने की जरूरत उन्होंने कहा कि दवा से होने वाली प्रतिकूल घटनाओं, औषधीय त्रुटियों, दवा की गलत मात्रा, दवाओं के पारस्परिक प्रभाव व दवाओं के अनुचित उपयोग से होने वाले नुकसान को केवल व्यक्तिगत गलती मानकर छोड़ना उचित नहीं है।
























