महराजगंज के बृजमनगंज थाना क्षेत्र के लेहरा कस्बे और आसपास के गांवों में दीपावली से पहले मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ गई है। कुम्हार एक महीने से दीये और दूसरी मिट्टी की चीजें बनाने में जुटे हैं।
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कोहरपुरवा के कुम्हार रामप्रीत ने बताया कि वह परिवार के साथ सुबह से देर रात तक चाक पर दीये बना रहे हैं। उन्हें सुखाने और पकाने का काम भी चल रहा है। इस बार छोटे-बड़े दीयों के साथ लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, करवा और झालर वाले दीयों की मांग है।
रामप्रीत ने कहा कि पिछले दो-तीन साल से चाइनीज लाइटों के कारण काम कम हो गया था। इस बार लोग फिर मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं। उनके मुताबिक, लोगों में स्वदेशी चीजों और पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
लेहरा बाजार में दीये खरीदने आईं सुनीता देवी, रीना और अन्य ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि मिट्टी के दीयों की बात बिजली की झालरों में नहीं है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीयों से घर में सकारात्मकता और शुद्धता आती है, इसलिए वे हर साल इन्हें जलाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मिट्टी के दीये खरीदने से संस्कृति को सहारा मिलता है और कुम्हारों को रोजगार मिलता है। एक दीये की कीमत 1 से 5 रुपये तक है।
लेहरा के अलावा हनुमानपुर, बेलवाडाड़ी, नारायनजोत, त्रिलोकपुर और कोहरपुरवा गांवों में भी दीयों की मांग बढ़ी है। कुम्हारों को उम्मीद है कि दीपावली पर उनकी बिक्री अच्छी रहेगी।












