बस्ती के हर्रैया क्षेत्र के रजौली गांव के निवासी प्रमोद ओझा अब तक 500 से ज्यादा सड़क हादसों में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने में मदद कर चुके हैं। शासन ने उन्हें राहवीर के रूप में चुना है। लोग उन्हें ‘हाईवे देवदूत’ के नाम से जानते हैं। प्रमोद का जन्म 1 जुलाई 1987 को हुआ था। वर्ष 1990 में सड़क हादसे में उनके बाबा की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद उन्होंने तय किया कि हादसे में घायल किसी व्यक्ति को मदद के अभाव में जान नहीं गंवानी चाहिए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसे की सूचना मिलते ही प्रमोद मदद के लिए पहुंचते हैं। कई बार स्थानीय लोग और राहगीर पुलिस या एंबुलेंस से पहले उन्हें सूचना देते हैं। वह घायलों को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि उन्हें समय पर इलाज मिल सके। घायलों की मदद के लिए शासन ने उन्हें राहवीर चुना है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, परिवहन विभाग और पुलिस विभाग ने भी उन्हें सम्मानित किया है। वह लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करते हैं। प्रमोद का कहना है कि उनके लिए घायल का सुरक्षित घर लौटना ही सबसे बड़ा सम्मान है। उनकी मुहिम का मकसद हादसे के बाद मदद करने के साथ लोगों में जिम्मेदारी की भावना जगाना भी है।
