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जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग वाली याचिका खारिज

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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज के दावों की जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस याचिका में कोई जनहित नहीं है।

याचिका नितिन नरेश ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने खुद को मीडियाकर्मी बताया है। याचिका में कहा गया था कि मीडिया रिपोर्टों में लाठीचार्ज का दावा किया गया है, जबकि दिल्ली पुलिस इस दावे को खारिज करती है, इसलिए इसमें विरोधाभास है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों को साक्ष्य के रूप में नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि क्या दिल्ली पुलिस और केंद्रीय पुलिस बलों के आधिकारिक बयानों में कोई विरोधाभास है। हम ऐसी याचिकाओं पर विचार नहीं करेंगे, यहां हर तरह के मामले दायर किए जा रहे हैं। इसमें कोई जनहित नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने 20 अगस्त को काकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का गठन किया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस प्रदर्शन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। इस कमेटी में पूर्व जज जस्टिस रवि शंकर झा, पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और पूर्व डीजीपी डॉ एल आर बिश्नोई शामिल हैं।