Home उत्तर प्रदेश अन्ना हजारे को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया 

अन्ना हजारे को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया 

0
0

मुंबई: समाजसेवक अन्ना हजारे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। उनकी तबीयत बिगड़ गई है। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है। उनके बारे में डॉक्टर गौतम भंसाली का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि अभी वह अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। किडनी की समस्या से गुजर रहे हैं अन्नाANI से मिली जानकारी के मुताबिक, अन्ना हजारे की किडनी में इंफेक्शन है। मिली जानकारी के मुताबिक, उन्हें तबीयत बिगड़ने के बाद रालेगणसिद्धि से मुंबई लाया गया था। अब अन्ना की तबीयत के अपडेट को लेकर देशभर की नजरें बॉम्बे हॉस्पिटल पर टिकी हुई हैं।  पिछले हफ्ते भी एक हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे पिछले हफ्ते भी अन्ना हजारे को यूरिन से जुड़ी दिक्कतों के कारण शिरूर के वेदांत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगभग तीन दिन के इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। इलाज के दौरान उनका क्रिएटिनिन लेवल बढ़ गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें आगे के इलाज के लिए मुंबई शिफ्ट करने का फैसला किया।  हाल ही में NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा में आए थे अन्ना हजारेअन्ना हजारे ने NEET पेपर लीक के विरोध में हो रहे प्रदर्शन का समर्थन किया था। हजारे ने कथित NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। उन्होंने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा की। हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत करने और उनकी चिंताओं का समाधान करने का आग्रह किया था। अपने पत्र में, हजारे ने हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरों को ‘दुखद’ बताया और ज़ोर दिया कि लोकतंत्र में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और बल के अनावश्यक प्रयोग के लिए कोई जगह नहीं है। हजारे ने जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में दो घंटे का मौन विरोध प्रदर्शन भी किया था। 23 जुलाई को, उन्होंने प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक यह मौन विरोध प्रदर्शन किया था। कैसे दुनिया की नजर में आए अन्ना?भ्रष्टाचार-विरोधी और सामाजिक सुधार अभियानों के लिए मशहूर अन्ना हजारे 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने एक मज़बूत लोकपाल कानून बनाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here