महराजगंज:रात के सन्नाटे में जब एक परिवार अपनी गहरी नींद में था, तब महराजगंज के ठूठीबारी थाना क्षेत्र के राजाबारी टोला रमजीता में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक साजिश रची जा रही थी। दो महीने का मासूम विक्की अपनी मां की आंचल की छांव में बेखबर सो रहा था, लेकिन वह यह नहीं जानता था कि कुछ ही घंटों में वह एक ऐसी काली दुनिया के चंगुल में फंसने वाला है, जहाँ जीवन और आस्था के मायने पूरी तरह बदल चुके थे।
अंधेरी रात और खौफनाक गायब होने का सिलसिला
बीती 3 नवंबर 2026 की रात, घड़ी की सुइयां जब रात के दो से चार के बीच का वक्त तय कर रही थीं, तब किसी अज्ञात साये ने घर की खामोशी का फायदा उठाया और पालने में सो रहे दो महीने के मासूम को चुरा लिया। सुबह जब परिवार की आंख खुली और बच्चे को गायब पाया, तो घर में कोहराम मच गया। पिता गोविंद के पैरों तले जमीन खिसक गई। ठूठीबारी थाने में फौरन मुकदमा दर्ज कराया गया, लेकिन तब तक किसी को अंदाज़ा नहीं था कि इस अपहरण के पीछे का सच कितना भयानक और सिहरन पैदा करने वाला है।
100 से अधिक कैमरों की आंखें और महराजगंज से दिल्ली तक का पीछा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में महराजगंज पुलिस, एसओजी, स्वाट और डॉग स्क्वायड की संयुक्त टीमें मैदान में उतर गईं। पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और घटनास्थल से लेकर दूर-दराज के इलाकों तक 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल डाली।
जांच के दौरान एक फुटेज में राजाबारी पुल के पास रात करीब 3:57 बजे एक संदिग्ध महिला हाथ में बच्चा लिए निचलौल रोड की तरफ जाती हुई कैद हुई। कड़ियों से कड़ियां जुड़ती गईं—महिला ठूठीबारी बस स्टैंड पहुँची, वहां से बस पकड़कर शिकारपुर मोड़ पर उतरी और घुघली की तरफ बढ़ गई। मुखबिर तंत्र और सर्विलांस के तकनीकी शिकंजे ने उस महिला की पहचान सावित्री (निवासी ग्राम कफवा, थाना घुघली) के रूप में कर ली।
महराजगंज की सीमा से शुरू हुआ यह तलाश का सफर उत्तर प्रदेश को पार करते हुए सीधे देश की राजधानी दिल्ली तक जा पहुंचा। पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए पीछा किया और नई दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड पर सावित्री को उसके साथी करण कुमार गौतम के साथ धर दबोचा। उनके पास मौजूद मासूम की तस्वीर जब व्हाट्सएप के जरिए पिता गोविंद के पास भेजी गई, तो उन्होंने रोते हुए अपने जिगर के टुकड़े विक्की के रूप में उसकी शिनाख्त की। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसे सुरक्षित उसके माता-पिता की गोद में सौंप दिया।
अंधविश्वास की इंतहा: अमावस्या पर बलि की खौफनाक पटकथा
जब पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो जो राज खुले, उन्होंने सुनने वालों की रूह कंपा दी। पूछताछ में सामने आया कि मासूम विक्की का अपहरण किसी फिरौती के लिए नहीं, बल्कि अमावस्या के दिन उसकी बलि देने के लिए किया गया था।
नेपाल के बैरियहवा के एक कथित ओझा और झाड़-फूंक करने वाले ने इन्हें यह खौफनाक रास्ता सुझाया था। आरोपियों का अंधविश्वास इस हद तक अंधा हो चुका था कि उनका मानना था—मासूम की बलि देने से सरस्वती का वर्षों से लापता पति और पुत्र वापस लौट आएंगे, और परिवार में अतीत में हुई अकाल मौतों का सिलसिला थम जाएगा। इस अंधविश्वास के काले जाल में सावित्री, सरस्वती (55 वर्ष) और सावित्री का दूसरा पति करण कुमार गौतम (22 वर्ष) पूरी तरह लिप्त पाए गए।
खाकी की मुस्तैदी और एक बड़ा सवाल
महराजगंज पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तकनीकी सर्विलांस और सूझबूझ ने एक मासूम की जान बचा ली। इस सराहनीय और साहसिक ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पुलिस टीम के लिए पुलिस अधीक्षक ने ₹25,000 के नकद पुरस्कार की घोषणा की है।
यह घटना हमारे समाज के उस अंधेरे कोने को बेनकाब करती है जहाँ आज भी अंधविश्वास और कूर प्रथाएं मासूमों की जिंदगियों को दांव पर लगा देती हैं। विक्की तो सुरक्षित अपनी माँ की गोद में लौट आया, लेकिन यह घटना महज़ एक अपहरण नहीं, बल्कि समाज की चेतना पर एक गंभीर सवाल छोड़ जाती है—आखिर कब तक आस्था के नाम पर ऐसे खौफनाक साये मासूमों की सांसों पर मंडराते रहेंगे?
रिपोर्ट :गजेन्द्र गुप्ता,व्यूरो MNT न्यूज -महराजगंज
