
महराजगंज के फरेन्दा क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय में शनिवार को ‘बैगलेस डे’ के अवसर पर विभिन्न रचनात्मक और व्यावहारिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों को बागवानी, कृषि और पर्यावरण संरक्षण का सीधा अनुभव कराया गया। प्रधानाध्यापक अरविन्द कुमार गौड़ ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन ने छात्रों को भारी बस्ते के बोझ से राहत देने के लिए हर शनिवार को ‘बैगलेस डे’ की पहल शुरू की है। इसके तहत बिना बैग के स्कूल आकर खेल, कला, क्राफ्ट और प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा दी जाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप, इसका मुख्य मकसद बच्चों का मानसिक, शारीरिक और रचनात्मक विकास करना है। इसका उद्देश्य रटने की प्रवृत्ति को कम कर अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। प्रधानाध्यापक अरविन्द गौड़ एवं सहायक शिक्षिका तसनीम कौसर के निर्देशन में विद्यालय परिसर में औषधीय पौधों का उद्यान, किचन गार्डेन (पोषण वाटिका) का विकास तथा कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराए गए। प्रधानाध्यापक ने बच्चों को संबोधित करते हुए औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तुलसी, नीम, एलोवेरा और स्टीविया जैसे पौधे विभिन्न बीमारियों के उपचार और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक होते हैं। विद्यालयों में पोषण वाटिका एक अनूठी पहल है, जिसके जरिए पढ़ाई के साथ-साथ ताजी और जैविक सब्जियां उगाने का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। इन सब्जियों का उपयोग मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) में किया जाता है, जिससे बच्चों को बिना केमिकल वाली ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिलती हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चों को कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) के जरिए जैविक खाद तैयार करने की विधियों से अवगत कराया गया, जिससे उन्हें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की जानकारी मिली। इस अवसर पर शिक्षक तसनीम कौसर, आरती रॉय, प्रियंका सिंह, मुन्नीलाल सहित खुशी, अंश, काजल, किंजल, श्यामू, अरविन्द, अभिषेक, अमन, करीना, पिंकी, पल्लवी, रुखसार और नासरा समेत सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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