
बस्ती के बहादुरपुर ब्लॉक के नेवरी गाड़ा कुसरौत गांव में दिव्यांग सरवन निषाद का परिवार आज भी पक्के मकान का इंतजार कर रहा है। उनका परिवार एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर है। सरवन निषाद पुत्र रामललित के पास खेती की जमीन नहीं है। परिजनों के मुताबिक, साल 2020 के बाद से सरवन की मानसिक हालत भी ठीक नहीं रहती है। ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी पत्नी धनावती देवी के कंधों पर आ गई है। धनावती देवी अपने पति की देखभाल के साथ तीन बच्चों का पालन-पोषण और उनकी पढ़ाई का खर्च भी किसी तरह उठा रही हैं। उनका बड़ा बेटा रमेश 14 साल का है और गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ता है। दूसरा बेटा धीरज छह साल का है, जबकि बेटी फूलमती नौ साल की है और कक्षा चार में पढ़ रही है। परिवार की सबसे बड़ी दिक्कत रहने के लिए सुरक्षित मकान का न होना है। पांच सदस्यों का यह परिवार एक टूटी-फूटी झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहा है। बरसात के दिनों में झोपड़ी की हालत और खराब हो जाती है। छत से पानी टपकने के कारण बच्चों और परिवार को काफी परेशानी होती है। सरकार गरीब और पात्र परिवारों को मकान देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कई योजनाएं चला रही है। इसके बावजूद सरवन का परिवार अब तक पक्के मकान से वंचित है। परिवार की आर्थिक और रहने की स्थिति को देखते हुए सरकारी योजनाओं की पात्रता पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर परिवार की ऐसी स्थिति है, तो मामले की जांच कराई जाएगी और पात्रता के हिसाब से उन्हें मदद दी जाएगी। अब देखना यह है कि जांच के बाद इस परिवार को सरकारी आवास का लाभ कब तक मिल पाता है।































