रामलीला में गूंजे श्रीराम के आदर्श, भावविभोर हुए श्रद्धालु:सिसवा की रामलीला में वनगमन, केवट संवाद और सीता हरण की भावपूर्ण लीलाओं ने बांधा समां

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हिन्दू कल्याण मंच द्वारा आयोजित रामलीला मंचन के तीसरे दिन बुधवार की रात प्रभु श्रीराम की भक्ति, श्रद्धा और आदर्शों की अनुपम छटा बिखरी। बाल कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। वनगमन, केवट संवाद, सूर्पनखा नासिका भेदन और सीता हरण की लीलाओं का मनोहारी मंचन देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयघोष और भक्तिमय उल्लास से गूंजता रहा। रामलीला के दौरान वनगमन प्रसंग ने दर्शकों को त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का संदेश दिया। राजमहल के सुखों को त्यागकर पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए वन की ओर प्रस्थान करने वाले भगवान श्रीराम के चरित्र ने उपस्थित लोगों को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ उनका वनगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष भावुक क्षण बना। केवट संवाद के मंचन में प्रभु श्रीराम और निषादराज केवट के बीच प्रेम, समर्पण तथा निष्काम भक्ति का सुंदर चित्रण हुआ। इस प्रसंग ने संदेश दिया कि ईश्वर के दरबार में धन, वैभव और ऊंच-नीच का कोई महत्व नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और निर्मल भाव ही सर्वोपरि हैं। कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया। इसके बाद सूर्पनखा नासिका भेदन और सीता हरण की लीला का मंचन हुआ। इन प्रसंगों ने रामायण की कथा को नया मोड़ देते हुए धर्म और अधर्म के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। बाल कलाकारों के अभिनय, संवाद और भावाभिव्यक्ति ने दर्शकों को कथा से जोड़े रखा। कार्यक्रम का संचालन उमेश उमंग ने किया। इस अवसर पर नितेश श्रीवास्तव, प्रमोद मद्धेशिया, विकास जायसवाल, रवि यादव, रविराज जायसवाल, आशीष अग्रवाल, दीपक जायसवाल, आशीष जायसवाल, मनोज लोहिया, विवेक जायसवाल, सुनील रौनियार, मोहन रौनियार, जयहिंद गुप्ता, अंकित लाठ और शुभम केडिया सहित मंच के अनेक पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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