बस्ती के मेघऊपुर गांव में पन्नी के नीचे जिंदगी गुजार रहे दिव्यांग गुड़िया के परिवार को करीब 30 साल बाद सरकारी योजनाओं का सहारा मिला है। दैनिक भास्कर में 12 सितंबर को परिवार की बदहाली की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। परिवार को उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, चूल्हा और राशन उपलब्ध कराया गया है। गुड़िया को काशीराम आवास कॉलोनी में एक घर भी आवंटित किया गया है। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे जब दैनिक भास्कर की टीम मेघऊपुर पहुंची तो मौके पर तहसीलदार सदर राजस्व टीम के साथ मौजूद थे। परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया चल रही थी। सुविधाएं मिलने के बाद गुड़िया के चेहरे पर खुशी नजर आई। लंबे समय से पन्नी के नीचे रहने को मजबूर परिवार को पहली बार पक्के आशियाने और सरकारी योजनाओं का सहारा मिलने की उम्मीद जगी है। परिवार में चार बच्चे दिव्यांग आजमगढ़ के सियरहा निवासी रामकिशन पांडेय कई साल पहले काम की तलाश में बस्ती आए थे। उन्होंने संतकबीरनगर निवासी गुड़िया से शादी की। गुड़िया दाहिने पैर से दिव्यांग हैं। दंपती के पांच बच्चे हैं। बड़ी बेटी की शादी करीब तीन महीने पहले हो चुकी है। बाकी एक बेटी और तीन बेटे दिव्यांग होने के साथ मानसिक रूप से भी अस्वस्थ बताए गए हैं। परिवार कई वर्षों से मेघऊपुर में पन्नी तानकर रह रहा था। इससे पहले भी अलग-अलग जगहों पर रहने के बावजूद उन्हें न आवास मिला और न राशन कार्ड। किसी सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिल पाया था। शौचालय नहीं होने के कारण परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर था। डीएम बोलीं- तत्काल राशन, गैस और चूल्हे की व्यवस्था डीएम कृतिका ज्योत्सना ने बताया कि रामकृष्ण पांडेय के परिवार के लिए तत्काल राशन, गैस और चूल्हे की व्यवस्था कराई गई है। राशन कार्ड और आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कराया गया है। उन्होंने बताया कि दो बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं, जबकि बाकी दो बच्चों के प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। बीएसए की ओर से बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर की व्यवस्था की गई है और उन्हें शैक्षिक सहयोग भी दिया जा रहा है। परिवार को आवास भी आवंटित कर दिया गया है। दैनिक भास्कर ने 12 सितंबर को ‘बस्ती में दिव्यांग परिवार पन्नी के नीचे रहने को मजबूर, न आशियाना मिला न राशन कार्ड’ शीर्षक से परिवार की स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर में परिवार की बदहाली, चार दिव्यांग बच्चों की जिम्मेदारी और सरकारी सुविधाओं से वंचित रहने की समस्या सामने लाई गई थी। इसके बाद प्रशासन ने परिवार की स्थिति का संज्ञान लेते हुए योजनाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई शुरू की।





















