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जज के खिलाफ अपमानजनक, मानहानिकारक या जाति-आधारित टिप्पणी करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं: मद्रास हाई कोर्ट

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डिजिटल डेस्क,चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर ताजा टिप्पणी की है। उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा कि किसी मौजूदा जज पर हमला करने के लिए अभद्र, अपमानजनक या जाति-आधारित भाषा का इस्तेमाल करना फ्री स्पीच के दायरे में नहीं आता है।

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि किसी कानूनी फैसले की आलोचना करने और उस फैसले को देने वाले जज पर हमला करने के बीच एक कानूनी अंतर साफ है।

पुलिस को दिया सख्त आदेश

अदालत ने तमिलनाडु पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि वे किसी ऐसी सार्वजनिक सभा या मार्च को अनुमति न दें, जिसका मकसद किसी मौजूदा जज को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना, बदनाम करना या डराना-धमकाना हो।

जनहित याचिका पर कोर्ट ने जारी किया आदेश

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने ये आदेश जारी किया है। ये सुनवाई आर. कार्तिकेयन की ओर से दायर एक पीआइएल पर की जा रही थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि ‘तमिलनाडु तौहीद जमात’ और ‘तमिलनाडु मुस्लिम मुनेत्र कझगम’ जैसे संगठनों को न्यायिक कार्यवाही से जुड़े प्रदर्शन करने और संवैधानिक अदालतों व मौजूदा जजों को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने से रोका जाए।

कार्यक्रम रोकने का आदेश

कोर्ट ने कहा कि अगर किसी प्रकार से अनुमति लेकर सभा को व्यक्तिगत हमले में बदला जाए तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत उस कार्यक्रम को समाप्त करने का अधिकार है और उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

क्या है विवाद

यह विवाद 25 जून को अदालत की मदुरै बेंच के एक फैसले से शुरू हुआ। इस फैसले में तमिलनाडु सरकार के 2024 के एक सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था। इस सरकारी आदेश के तहत, पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, विमुक्त समुदायों या अनुसूचित जातियों से इस्लाम धर्म अपनाने वाले लोगों को ‘पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम)’ समुदायों के लिए राज्य के 3.5% आरक्षण का लाभ लेने की अनुमति दी गई थी।

मुस्लिम संगठनों ने जताया विरोध

इसी मामले पर याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, इसके बाद राज्य भर में कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। शिकायतकर्ता ने कहा कि ये प्रदर्शन जल्द ही अपमानजनक अभियानों में बदल गए, जिनका निशाना डिवीजन बेंच के एक मौजूदा जज थे।

नासिरगंज की गली में कचरा जमा:10-15 परिवारों का घर पहुंचने का यही मुख्य रास्ता, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को आने-जाने में परेशानी

श्रावस्ती जिले के जमुनहा ब्लॉक के नासिरगंज कस्बे में मुख्य चौराहे के पास की गली कचरे से भर गई है। इससे करीब 10 से 15 परिवारों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनके घरों तक पहुंचने का यही एकमात्र मुख्य रास्ता है। गली में कचरे का ढेर जमा है। लोगों का कहना है कि रास्ते की खराब हालत के कारण रोजाना आने-जाने वाले स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को दिक्कत होती है। फिसलने के डर से लोग इस रास्ते से गुजरने से भी डरते हैं। स्थानीय निवासी अंजुम, इतबार, जाने आलम और कैफ ने प्रशासन से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है।

‘ऐसे मामलों की पहचान करें, जिन्हें वापस लिया जा सकता है’; मंत्रालयों को सरकार का निर्देश

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों की पहचान करें जिन्हें वापस लिया जा सकता है।

यह कदम जन विश्वास अधिनियम के तहत कई अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और पुराने पड़ चुके कानूनी प्रावधानों को खत्म करने के बाद उठाया गया है। उन्हें इस महीने के अंत तक यह काम पूरा करने के लिए कहा गया है।

सरकार ने क्यों उठाया ये कदम?

यह कदम सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसका मकसद कानूनी मुकदमों के बोझ को कम करना और ऐसे मामलों को आगे न बढ़ाना है, जो कानूनी ढांचे में बदलाव के बाद अब अप्रासंगिक हो गए हैं। इस समीक्षा में वे मामले शामिल होंगे, जो किसी कानून में हुए संशोधन या अन्य कानूनी सुधारों से प्रभावित हुए हैं।

कितने मामले लंबित हैं?

फिलहाल, केंद्र सरकार से जुड़े 3.5 लाख से अधिक मामले पांच साल से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। इनमें 19 उच्च न्यायालयों में चल रहे एक लाख से अधिक पुराने (लेगेसी) मामले भी शामिल हैं।

एक प्रेजेंटेशन के अनुसार, राजस्व विभाग में 5 साल से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या सबसे अधिक (1.27 लाख) है। इसके बाद रेलवे (45,583), सैन्य मामलों के विभाग (32,464), श्रम और रोजगार मंत्रालय (28,822) और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (27,109) का नंबर आता है।

अधिकारियों ने बताया कि सड़क परिवहन, रक्षा और दूरसंचार जैसे कुछ मंत्रालयों में लंबित मामलों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन इन मुकदमों से जुड़े वित्तीय परिणाम काफी बड़े हो सकते हैं।

जन विश्वास कानूनों के तहत 2023 और 2026 में हुए दो चरणों में विभिन्न केंद्रीय कानूनों की कई धाराओं को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है और अनुपालन प्रावधानों को शामिल करके उन्हें तर्कसंगत बनाया गया है।

लॉन्च किया जाएगा पोर्टल

सभी सचिवों की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सोमनाथन ने उन्हें बताया कि नवंबर में एक समर्पित मुकदमा प्रबंधन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। इसका उद्देश्य मुकदमा प्रबंधन सेल के कामकाज की निगरानी करना, पुराने मुकदमों और अपीलों की समीक्षा करना, मध्यस्थता और मामलों की स्क्रीनिंग करना है। मंत्रालयों और विभागों को नियमित रूप से मामलों की स्थिति अपडेट करनी होगी।

महराजगंज में बारिश से धान की फसल खेतों में गिरी:हार्वेस्टर से कटाई में आएगी दिक्कत, सब्जियों को भी नुकसान का खतरा

महराजगंज में शुक्रवार को दिनभर हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। लगातार बारिश और तेज हवाओं के चलते कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में खड़ी धान की पकी फसल जमीन पर बिछ गई। इससे किसानों को फसल के नुकसान के साथ कटाई में देरी की आशंका सताने लगी है। किसानों का कहना है कि धान की फसल पककर तैयार थी और कई लोग कटाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बारिश के कारण काम रोकना पड़ा। खेतों में धान की फसल गिरने से अब हार्वेस्टर और कंबाइन मशीन से कटाई करना आसान नहीं होगा। इससे कटाई में अधिक समय और खर्च लग सकता है। खेतों में पानी जमा होने से मशीनों के पहुंचने में भी परेशानी होगी। वहीं, फसल के लगातार भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने और दानों में नमी बढ़ने की आशंका है। मजदूरों और मशीनों की व्यवस्था रुकी किसानों के मुताबिक, धान की फसल पूरी तरह पक चुकी है। कई किसानों ने कटाई के लिए मजदूरों और मशीनों की व्यवस्था भी कर ली थी, लेकिन लगातार बारिश के चलते काम रोकना पड़ा। खेतों में नमी और पानी जमा रहने से कटाई शुरू करने में देरी हो सकती है। सब्जियों को नुकसान, सरसों-मटर के लिए नमी फायदेमंद बारिश का असर सब्जियों की खेती पर भी पड़ने की आशंका है। गोभी, फूलगोभी सहित अन्य सब्जियों के खेतों में पानी जमा होने से पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि सरसों और मटर की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए खेतों में आई नमी कुछ हद तक फायदेमंद हो सकती है। मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे किसान किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम साफ नहीं हुआ तो धान की फसल को और नुकसान हो सकता है। दिनभर हुई बारिश के बाद अब किसानों की निगाहें मौसम खुलने पर टिकी हैं, ताकि जल्द कटाई कर उपज को सुरक्षित किया जा सके।

बहू के कमरे में बेड के नीचे छिपा मिला युवक:बस्ती में पकड़ने की कोशिश पर परिवार को पीटा

बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के मुड़बरा चिन्ता गांव में बहू के कमरे में छिपे युवक को पकड़ने की कोशिश के बाद एक परिवार पर हमला हुआ। पुलिस ने शिकायत पर चार नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है। घटना 29 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे की है। गांव के राजेंद्र यादव (पुत्र चौथी) के घर में बच्चों ने मोनू को बहू के कमरे में बेड के नीचे छिपा देखा। बच्चों के शोर मचाने पर राजेंद्र वहां पहुंचे और मोनू को पकड़ने की कोशिश की। आरोप है कि मोनू गाली-गलौज कर वहां से भाग गया। कुछ देर बाद मोनू अपने साथियों सर्वेश (पुत्र सूरत), सूरत यादव और सुक्खूनाथ (पुत्रगण राम उजागिर) के साथ लौट आया। गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी शिकायत के मुताबिक, वे गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देते हुए घर में घुसे। उन्होंने राजेंद्र यादव, उनकी पत्नी और छोटे नाती को लाठी-डंडों से पीटा। तीनों को चोटें आईं। हमले के बाद परिवार इलाज के लिए जिला अस्पताल बस्ती गया। उपचार के बाद 30 अक्टूबर को थाने में लिखित शिकायत दी गई। वाल्टरगंज पुलिस ने सुबह 11 बजे केस दर्ज किया। मामले की जांच उपनिरीक्षक राम पाल को सौंपी गई है।

सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर रोक बरकरार, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बदला सिंगल जज का फैसला

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डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट की सिंगल जज ने प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर लगी रोक हटा दी थी। लेकिन सिर्फ चार घंटे के अंदर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मांसाहारी भोजन की बिक्री पर लगी रोक को फिर से बहाल कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश मानस रंजन पाठक और न्यायमूर्ति निर्जर देसाई की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने गुजरात सरकार की एक तत्काल अपील के बाद न्यायमूर्ति निशा ठाकोर के फैसले पर रोक लगा दी।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि कलेक्टर का वह नोटिफिकेशन, जिसमें मांसाहारी भोजन की बिक्री पर रोक लगाई गई थी, फिलहाल लागू रहेगा। खंडपीठ इस मामले पर अगली सुनवाई 26 दिसंबर को करेगी।

डिवीजन बेंच ने रोक को किया बहाल

शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे न्यायमूर्ति निशा ठाकोर ने गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर के पास होटल और रेस्तरां चलाने वाले मालिकों की याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था और नोटिफिकेशन को रद कर दिया था।

हाई कोर्ट की सिंगल जज के इस आदेश के बाद सरकारी वकील जी.एच. विर्क तुरंत कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास पहुंचे। इसके बाद, कोर्ट के समय के बाद एक डिवीजन बेंच ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की।

शाम को, एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी और सरकारी वकील ने हरिद्वार जैसे अन्य धार्मिक शहरों का उदाहरण दिया, जहां अदालतों ने ऐसे प्रतिबंधों को सही ठहराया था।

वकीलों ने तर्क दिया कि सोमनाथ मंदिर के आस-पास कुछ इलाकों में मांसाहारी भोजन पर रोक लगाना सही है, ताकि तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई तक लगाई रोक

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच ने कहा, ’10 अगस्त 2026 का वह नोटिफिकेशन लागू रहेगा, जिसके तहत सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में, और इस इलाके के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली छह चिन्हित सड़कों पर मांसाहारी भोजन को बनाने, रखने और बेचने पर रोक लगाई गई है।’

होटल और रेस्तरां मालिकों ने अपनी याचिकाओं में तर्क दिया कि ये पाबंदियां उनके वैध व्यवसाय करने और अपनी आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती हैं।

राज्य सरकार ने दलील दी कि व्यवसाय करने की संवैधानिक स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी भी जगह पर हर तरह की व्यावसायिक गतिविधि कर सकता है, भले ही उस जगह का धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व कुछ भी हो।

ढाई महीने की बच्ची की मां की संदिग्ध मौत:श्रावस्ती में पिता ने प्रताड़ना का आरोप लगाया, डेढ़ साल पहले हुआ था निकाह

श्रावस्ती के भिनगा कोतवाली क्षेत्र में विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कमरे से काफी देर तक बाहर नहीं निकलने पर ससुराल वालों ने खिड़की तोड़कर उन्हें बाहर निकाला और जिला अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मायके पक्ष ने बेटी के साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। डेढ़ साल पहले हुआ था निकाह मुस्कान का निकाह करीब डेढ़ साल पहले इकौना के पटेल नगर निवासी रोज अली ने हनुमानगढ़ी निवासी शोएब के साथ किया था। मुस्कान की करीब ढाई महीने की एक बच्ची है। गुरुवार को वह अपने कमरे में गई थीं। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर ससुराल वालों ने खिड़की तोड़कर उन्हें बाहर निकाला। खिड़की तोड़कर अस्पताल ले गए ससुराल वाले परिजन मुस्कान को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर मायके पक्ष के लोग भी पहुंचे। शुक्रवार रात करीब 8 बजे पिता रोज अली ने बेटी के साथ अनहोनी की आशंका जताई। पिता बोले- चार-पांच दिन से बेटी को परेशान कर रहा था दामाद रोज अली ने दामाद शोएब पर बेटी को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों से शोएब बेटी को परेशान कर रहा था। मुस्कान फोन पर अपनी मां को अपनी परेशानी बताती थीं। मायके वालों ने उसे घर बुलाने की बात कही थी, लेकिन ससुराल पक्ष ने दीपावली के बाद भेजने की बात कहकर मना कर दिया था। मौत से दो घंटे पहले मां से हुई थी बात पिता के मुताबिक, घटना वाले दिन मुस्कान ने अपनी मां से फोन पर बात की थी। बातचीत के करीब दो घंटे बाद उनकी मौत की सूचना मिली। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, ससुराल पक्ष का कहना है कि मुस्कान ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कैंसर की दवाओं पर 2019 में 30 प्रतिशत था मार्जिन कैप, अब 700 प्रतिशत तक पहुंचा; आंकड़ों ने किया हैरान

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फरवरी 2019 में नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कुछ दवाओं की बिक्री कीमत पर 30 प्रतिशत का ट्रेड मार्जिन कैप (सीमा) तय किया था। इन दवाओं पर लगे मार्क-अप पर नजर डालने से पता चलता है कि अथॉरिटी की 2026 की सूची में शामिल ज्यादातर दवाओं पर 100 प्रतिसत से 700 प्रतिशत तक का मार्क-अप था।

इस डेटा का हवाला देते हुए सस्ती दवाओं की उपलब्धता के लिए काम करने वाले ऑल-इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क ने बताया कि अगर मार्जिन कैप को स्थायी रूप से लागू करने और लगातार निगरानी रखने की कोई व्यवस्था न हो तो सिर्फ एक बार एमआरपी कम करने की नीति का कोई खास फायदा नहीं है।

कितना अंतर पाया गया?

एनपीपीए ने कैंसर-रोधी दवाओं की जो सूची जारी की है और जिसमें ट्रेड मार्जिन घटाने की बात कही गई है, उसमें कुल 137 दवाएं शामिल हैं। इनमें से 34 दवाएं ऐसी हैं जो 2019 में एनपीपीए द्वारा जारी 42 कैंसर-रोधी दवाओं की सूची में भी थीं।

हालांकि, एनपीपीए द्वारा हाल ही में जारी की गई सूची और जिसमें एमआरपी में भारी कमी दिखाई गई है, उससे पता चलता है कि 2019 की सूची में शामिल अधिकांश दवाएं जो 2026 की सूची में भी हैं, उन्होंने 43 प्रतिशत मार्क-अप के स्तर को पार कर लिया है।

यह स्तर 30 प्रतिशत ट्रेड मार्जिन के बराबर है, क्योंकि जहां मार्जिन की गणना अंतिम एमआरपी के प्रतिशत के रूप में की जाती है, वहीं मार्क-अप की गणना स्टॉकिस्ट को दी जाने वाली कीमत के प्रतिशत के रूप में की जाती है।

2019 से 2026 में कितना अंतर

हालिया आदेश से पहले 2026 में मार्क-अप 2019 के आदेश से पहले के स्तर से भी अधिक था। इसलिए, सात साल पहले की तुलना में अब ज्यादातर मामलों में कीमतों में प्रतिशत के हिसाब से कमी भी काफी ज्यादा है। हालांकि, जिन दवाओं की एमआरपी में 2019 में बहुत भारी कटौती की गई थी, उनके मामले में 2026 में प्रतिशत के हिसाब से कमी कम है।

उदाहरण के लिए, कैंसर-रोधी दवा पेमेट्रेक्सेड के एक ब्रांड की एमआरपी 2019 में 7,000 रुपये से घटकर 800 रुपये हो गई थी। हाल ही में हुई एमआरपी कटौती में यह 1,095 रुपये से घटकर 297 रुपये हो गई है, जो 2019 की तुलना में काफी कम कटौती है।

कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने जिन्होंने 2019 में एमआरपी में काफी कमी की थी, इस बार बहुत कम या बिल्कुल भी कमी नहीं की है। वहीं, कुछ मूल कंपनियों जिनके पास शुरू में दवा का पेटेंट था, उन्होंने दोनों ही मौकों पर एमआरपी में कोई खास कटौती नहीं की।

2019 की सूची में शामिल ब्रांडों में से केवल पांच का मार्क-अप, नवीनतम आदेश से पहले 43 प्रतिशत था, जबकि अन्य चार का मार्क-अप 43 प्रतिशत से 100% के बीच था। बाकी 39 ब्रांडों का मार्क-अप 100 प्रतिशत से लेकर 700 प्रतिशत से भी अधिक था।

AIDAN की मालिनी ऐसोला ने कहा, “एनपीपीए इसे ट्रेड मार्जिन कैपिंग कह रहा है, जैसा कि उन्होंने 2019 में भी कहा था। यह गुमराह करने वाला है क्योंकि यह कोई कैप (सीमा) नहीं है। यह बस मार्क-अप को सीमित करके एमआरपी में एक बार की गई कटौती है।” उन्होंने आगे कहा कि यह मार्क-अप को दोबारा बढ़ने से रोकने के लिए काफी नहीं होगा, जैसा कि 2019 के बाद हुआ था।

यह भी पढ़ें: कैंसर-रोधी प्रमुख दवाओं की एमआरपी सूची जारी, कीमतों में कोई बदलाव नहीं, लेकिन लाखों में बनी हुई है मूल लागत

सोनौली पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी पकड़ा:महराजगंज कोर्ट भेजा गया

महराजगंज के सोनौली थाने की पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में वांछित सोहेल को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसे 31 अक्टूबर 2026 को महराजगंज कोर्ट भेजा।
पुलिस के मुताबिक, सोहेल पुत्र अशरफ अली वार्ड नंबर 03, पिपरहिया टोला सिहरहिया का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 22 साल है। उसके खिलाफ मुकदमा नंबर 40/2026 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22/23 के तहत केस दर्ज है।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सोहेल के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में सब-इंस्पेक्टर शक्ति कुमार सिंह, सब-इंस्पेक्टर अजय कुमार और कांस्टेबल आदित्य प्रताप सिंह शामिल थे।

ATM कार्ड बदलकर महिला के खाते से 25,900 निकाले:बस्ती में PNB बूथ पर हुई ठगी; अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज

बस्ती के गदही में एटीएम कार्ड बदलकर एक महिला के खाते से 25,900 रुपए निकाल लिए गए। महिला की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है। कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम लवनापार, पोस्ट मंझरिया विक्रम की रचना देवी पत्नी कृष्णभान 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 1:15 बजे गदही स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एटीएम बूथ पर पैसे निकालने गई थीं। वहां पहुंचे अज्ञात लोगों ने उनका एटीएम कार्ड बदल दिया। रचना देवी को ठगी का पता तब चला, जब उनके मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने का संदेश आया। उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत दी। पुलिस ने 30 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:26 बजे कोतवाली थाने में FIR नंबर 0489/2026 दर्ज की। थाना प्रभारी निरीक्षक बृजानंद सिंह के निर्देशन में मामले की जांच उपनिरीक्षक राम कुमार यादव कर रहे हैं। पुलिस एटीएम बूथ और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देख रही है और आरोपियों की तलाश कर रही है।