Home Blog Page 16

ढाई महीने की बच्ची की मां की संदिग्ध मौत:श्रावस्ती में पिता ने प्रताड़ना का आरोप लगाया, डेढ़ साल पहले हुआ था निकाह

श्रावस्ती के भिनगा कोतवाली क्षेत्र में विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कमरे से काफी देर तक बाहर नहीं निकलने पर ससुराल वालों ने खिड़की तोड़कर उन्हें बाहर निकाला और जिला अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मायके पक्ष ने बेटी के साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। डेढ़ साल पहले हुआ था निकाह मुस्कान का निकाह करीब डेढ़ साल पहले इकौना के पटेल नगर निवासी रोज अली ने हनुमानगढ़ी निवासी शोएब के साथ किया था। मुस्कान की करीब ढाई महीने की एक बच्ची है। गुरुवार को वह अपने कमरे में गई थीं। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर ससुराल वालों ने खिड़की तोड़कर उन्हें बाहर निकाला। खिड़की तोड़कर अस्पताल ले गए ससुराल वाले परिजन मुस्कान को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर मायके पक्ष के लोग भी पहुंचे। शुक्रवार रात करीब 8 बजे पिता रोज अली ने बेटी के साथ अनहोनी की आशंका जताई। पिता बोले- चार-पांच दिन से बेटी को परेशान कर रहा था दामाद रोज अली ने दामाद शोएब पर बेटी को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों से शोएब बेटी को परेशान कर रहा था। मुस्कान फोन पर अपनी मां को अपनी परेशानी बताती थीं। मायके वालों ने उसे घर बुलाने की बात कही थी, लेकिन ससुराल पक्ष ने दीपावली के बाद भेजने की बात कहकर मना कर दिया था। मौत से दो घंटे पहले मां से हुई थी बात पिता के मुताबिक, घटना वाले दिन मुस्कान ने अपनी मां से फोन पर बात की थी। बातचीत के करीब दो घंटे बाद उनकी मौत की सूचना मिली। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, ससुराल पक्ष का कहना है कि मुस्कान ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कैंसर की दवाओं पर 2019 में 30 प्रतिशत था मार्जिन कैप, अब 700 प्रतिशत तक पहुंचा; आंकड़ों ने किया हैरान

0

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फरवरी 2019 में नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कुछ दवाओं की बिक्री कीमत पर 30 प्रतिशत का ट्रेड मार्जिन कैप (सीमा) तय किया था। इन दवाओं पर लगे मार्क-अप पर नजर डालने से पता चलता है कि अथॉरिटी की 2026 की सूची में शामिल ज्यादातर दवाओं पर 100 प्रतिसत से 700 प्रतिशत तक का मार्क-अप था।

इस डेटा का हवाला देते हुए सस्ती दवाओं की उपलब्धता के लिए काम करने वाले ऑल-इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क ने बताया कि अगर मार्जिन कैप को स्थायी रूप से लागू करने और लगातार निगरानी रखने की कोई व्यवस्था न हो तो सिर्फ एक बार एमआरपी कम करने की नीति का कोई खास फायदा नहीं है।

कितना अंतर पाया गया?

एनपीपीए ने कैंसर-रोधी दवाओं की जो सूची जारी की है और जिसमें ट्रेड मार्जिन घटाने की बात कही गई है, उसमें कुल 137 दवाएं शामिल हैं। इनमें से 34 दवाएं ऐसी हैं जो 2019 में एनपीपीए द्वारा जारी 42 कैंसर-रोधी दवाओं की सूची में भी थीं।

हालांकि, एनपीपीए द्वारा हाल ही में जारी की गई सूची और जिसमें एमआरपी में भारी कमी दिखाई गई है, उससे पता चलता है कि 2019 की सूची में शामिल अधिकांश दवाएं जो 2026 की सूची में भी हैं, उन्होंने 43 प्रतिशत मार्क-अप के स्तर को पार कर लिया है।

यह स्तर 30 प्रतिशत ट्रेड मार्जिन के बराबर है, क्योंकि जहां मार्जिन की गणना अंतिम एमआरपी के प्रतिशत के रूप में की जाती है, वहीं मार्क-अप की गणना स्टॉकिस्ट को दी जाने वाली कीमत के प्रतिशत के रूप में की जाती है।

2019 से 2026 में कितना अंतर

हालिया आदेश से पहले 2026 में मार्क-अप 2019 के आदेश से पहले के स्तर से भी अधिक था। इसलिए, सात साल पहले की तुलना में अब ज्यादातर मामलों में कीमतों में प्रतिशत के हिसाब से कमी भी काफी ज्यादा है। हालांकि, जिन दवाओं की एमआरपी में 2019 में बहुत भारी कटौती की गई थी, उनके मामले में 2026 में प्रतिशत के हिसाब से कमी कम है।

उदाहरण के लिए, कैंसर-रोधी दवा पेमेट्रेक्सेड के एक ब्रांड की एमआरपी 2019 में 7,000 रुपये से घटकर 800 रुपये हो गई थी। हाल ही में हुई एमआरपी कटौती में यह 1,095 रुपये से घटकर 297 रुपये हो गई है, जो 2019 की तुलना में काफी कम कटौती है।

कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने जिन्होंने 2019 में एमआरपी में काफी कमी की थी, इस बार बहुत कम या बिल्कुल भी कमी नहीं की है। वहीं, कुछ मूल कंपनियों जिनके पास शुरू में दवा का पेटेंट था, उन्होंने दोनों ही मौकों पर एमआरपी में कोई खास कटौती नहीं की।

2019 की सूची में शामिल ब्रांडों में से केवल पांच का मार्क-अप, नवीनतम आदेश से पहले 43 प्रतिशत था, जबकि अन्य चार का मार्क-अप 43 प्रतिशत से 100% के बीच था। बाकी 39 ब्रांडों का मार्क-अप 100 प्रतिशत से लेकर 700 प्रतिशत से भी अधिक था।

AIDAN की मालिनी ऐसोला ने कहा, “एनपीपीए इसे ट्रेड मार्जिन कैपिंग कह रहा है, जैसा कि उन्होंने 2019 में भी कहा था। यह गुमराह करने वाला है क्योंकि यह कोई कैप (सीमा) नहीं है। यह बस मार्क-अप को सीमित करके एमआरपी में एक बार की गई कटौती है।” उन्होंने आगे कहा कि यह मार्क-अप को दोबारा बढ़ने से रोकने के लिए काफी नहीं होगा, जैसा कि 2019 के बाद हुआ था।

यह भी पढ़ें: कैंसर-रोधी प्रमुख दवाओं की एमआरपी सूची जारी, कीमतों में कोई बदलाव नहीं, लेकिन लाखों में बनी हुई है मूल लागत

सोनौली पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी पकड़ा:महराजगंज कोर्ट भेजा गया

महराजगंज के सोनौली थाने की पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में वांछित सोहेल को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसे 31 अक्टूबर 2026 को महराजगंज कोर्ट भेजा।
पुलिस के मुताबिक, सोहेल पुत्र अशरफ अली वार्ड नंबर 03, पिपरहिया टोला सिहरहिया का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 22 साल है। उसके खिलाफ मुकदमा नंबर 40/2026 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22/23 के तहत केस दर्ज है।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सोहेल के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में सब-इंस्पेक्टर शक्ति कुमार सिंह, सब-इंस्पेक्टर अजय कुमार और कांस्टेबल आदित्य प्रताप सिंह शामिल थे।

ATM कार्ड बदलकर महिला के खाते से 25,900 निकाले:बस्ती में PNB बूथ पर हुई ठगी; अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज

बस्ती के गदही में एटीएम कार्ड बदलकर एक महिला के खाते से 25,900 रुपए निकाल लिए गए। महिला की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है। कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम लवनापार, पोस्ट मंझरिया विक्रम की रचना देवी पत्नी कृष्णभान 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 1:15 बजे गदही स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एटीएम बूथ पर पैसे निकालने गई थीं। वहां पहुंचे अज्ञात लोगों ने उनका एटीएम कार्ड बदल दिया। रचना देवी को ठगी का पता तब चला, जब उनके मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने का संदेश आया। उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत दी। पुलिस ने 30 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:26 बजे कोतवाली थाने में FIR नंबर 0489/2026 दर्ज की। थाना प्रभारी निरीक्षक बृजानंद सिंह के निर्देशन में मामले की जांच उपनिरीक्षक राम कुमार यादव कर रहे हैं। पुलिस एटीएम बूथ और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देख रही है और आरोपियों की तलाश कर रही है।

प्राइवेसी एक्ट में हो सकता है संशोधन, सरकार ने दिए संकेत; आईटी मंत्रालय बोला- जरूरत पड़ी तो रद करेंगे

0

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के नियमों में बदलाव करने के लिए तैयार है। अगर जरूरत पड़ी तो कानून में भी बदलाव किया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसके लागू होने से पत्रकारों और मीडिया हाउसों के काम में कोई रुकावट न आए।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कानून के वे हिस्से, जिन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देने वाले संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला बताया जा रहा है वे डेटा फिड्यूशियरी (डेटा रखने और नियंत्रित करने वाली संस्थाओं) पर लागू होते हैं न कि पत्रकारों पर।

पत्रकार और मीडिया हाउस इस कानून के दायरे में नहीं

अधिकारियों ने कहा, “यह कानून केवल डेटा फिड्यूशियरी पर लागू होता है यानी वे लोग या संस्थाएं जो डेटा रखती हैं और उसे नियंत्रित करती हैं। पत्रकार और मीडिया हाउस इस श्रेणी में नहीं आते हैं।”

जरूरत पड़ने पर संशोधन भी संभव

जब उन्हें पत्रकारों की इस चिंता के बारे में बताया गया कि डीपीडीपी एक्ट में मीडिया हाउसों को स्पष्ट रूप से छूट नहीं दी गई है तो उन्होंने कहा, “इस संबंध में किसी भी चिंता को दूर करने के लिए नियमों में हमेशा संशोधन किया जा सकता है। नियमों की शक्ति भी कानून के बराबर ही होती है। यदि आवश्यक हुआ तो हम कानून में बदलाव करने के लिए एक कदम और आगे भी जा सकते हैं।”

डीपडीपी एक्ट को नागरिकों के निजता के अधिकार, डेटा की सुरक्षा की आवश्यकता और डेटा फिड्यूशियरी (डेटा रखने वाली संस्थाओं) पर जिम्मेदारियां तय करने के आधार पर सही ठहराया गया है।

क्या है मामला?

केंद्र की यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की एक याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। डीएनपीए भारत के 21 प्रमुख न्यूज मीडिया संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है और इसने इस कानून तथा इसके तहत बने नियमों के कई प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी है।

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और इससे पत्रकारिता से जुड़ी सभी तरह की गतिविधियों पर खतरा पैदा होता है।

मंत्रालय ने क्या कहा?

अधिकारियों ने कहा कि डीपीडीपी एक्ट के पत्रकारों के लिए रुकावट बनने की चिंता को दूर किया जाएगा। इसके लिए नियमों में और जरूरत पड़ने पर खुद कानून में ही उनके लिए छूट का प्रावधान किया जाएगा।

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि डीपीडीपी अधिनियम की धारा 7 बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों और बीमा कंपनियों जैसे डेटा फिड्यूशियरी के लिए है और मीडिया इसके दायरे में नहीं आता है।

उन्होंने कहा, “यह सरकार संविधान द्वारा गारंटीकृत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकारों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”

धारा 7 में कहा गया है कि डेटा प्रिंसिपल के व्यक्तिगत डेटा को डेटा फिड्यूशियरी द्वारा (a) उस विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्रोसेस किया जा सकता है, जिसके लिए डेटा प्रिंसिपल ने स्वेच्छा से अपना व्यक्तिगत डेटा दिया है और जिसके संबंध में उसने यह नहीं बताया है कि वह अपने व्यक्तिगत डेटा के उपयोग के लिए सहमति नहीं देती है।

बारिश के बाद नासिरगंज की सड़क पर पानी भरा:3-4 साल से टूटी नाली की मरम्मत नहीं, बच्चों और राहगीरों को परेशानी

श्रावस्ती जिले के जमुनहा ब्लॉक के नासिरगंज कस्बे में हुसैनिया मस्जिद के पास मुख्य सड़क पर बारिश के बाद पानी भर गया। शुक्रवार से हो रही बूंदाबांदी के बाद शनिवार सुबह सड़क पर तालाब जैसा पानी जमा हो गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क किनारे की नाली 3-4 साल से टूटी है। मरम्मत नहीं होने से बारिश का पानी सड़क पर फैल जाता है। हल्की बारिश में भी यहां पानी और कीचड़ जमा हो जाता है।
इस रास्ते से रोज स्कूली बच्चे और राहगीर आते-जाते हैं। पानी और कीचड़ के कारण बच्चों और बुजुर्गों को निकलने में परेशानी होती है। गंदे पानी से गुजरते समय बच्चों के गिरने और चोट लगने का डर रहता है।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने जिला प्रशासन से नाली की मरम्मत और सड़क से जलभराव हटाने की मांग की है।

‘SIR खत्म होने का मतलब मतदाता सूची फ्रीज होना नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट

0

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) पूरा होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची को ‘फ्रीज'(नए अपडेट पर रोक) कर दिया गया है। सु्प्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुछ राज्यों में एसआइआर की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये कहा।

केरल, छ्त्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में एसआइआर (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया।

हटे नाम दुबारा जोड़े जा सकेंगे

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की बेंच के फैसले से ये साफ हो गया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटे नाम दुबारा जोड़े जा सकते हैं। इससे लाखों लोगों को वोट डालने के अधिकार से वंचित होने से रोका जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि समय बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।

चुनाव में नामांकन दाखिल होने तक जोड़े जा सकते हैं नाम

वरिष्ठ वकील डी. एस. नायडू ने बताया कि लोग एसआइआर के बाद भी अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल होने तक नाम जोड़े जा सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में ‘फॉर्म 7’ स्वीकार करने में गड़बड़ी की थी।

दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

आयोग ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुधार के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं। आयोग ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वे चुनाव आयोग के सामने गड़बड़ियों को उठा सकते हैं।

केरल में एसआइआर का काम फरवरी में पूरा

चुनाव आयोग ने बताया कि केरल में एसआइआर का काम फरवरी में पूरा हो गया था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में इसी मतदाता सूचियों का इस्तेमाल किया गया था। वकील जी. प्रकाश के माध्यम से सीपीएम (CPM) ने कहा कि अभी भी 24 लाख मतदाता सूची से बाहर हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीपीएम से उन मतदाताओं की डिटेल की मांग की जो वक्त की कमी की वजह से अपने फॉर्म जमा नहीं कर पाए थे। ये मांग इसलिए की गई है की ताकि चुनाव आयोग इन मामलों की जांच कर सके। इसके बाद आयोग को जो भी सुधार की जरूरत महसूस हो वो कदम उठा सके।

चुनाव आयोग से मांगा जवाब

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि केरल में एसआइआर (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने प्रक्रिया पूरी हो जाने के बावजूद चुनाव आयोग से एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने की मांग की। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से इस याचिका और रामचंद्रन के नोट, दोनों पर जवाब देने को कहा है।

एगडेगवा का सामुदायिक केंद्र निर्माण के बाद से बंद:ग्रामीणों ने ताला खुलवाकर संचालन शुरू कराने की मांग की

महराजगंज के बृजमनगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत एगडेगवा में बना सामुदायिक विकास केंद्र निर्माण पूरा होने के बाद से बंद है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से बने इस भवन का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। सरकारी योजनाओं के तहत गांवों में सामुदायिक गतिविधियों और जरूरी सुविधाओं के लिए ऐसे भवन बनाए जाते हैं। एगडेगवा के केंद्र का इस्तेमाल नहीं होने से इसके संचालन और रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, भवन बनने के बाद से यहां कोई सामुदायिक गतिविधि नहीं हुई है। भवन का नियमित उपयोग भी नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से केंद्र की स्थिति की जांच कराने, ताला खुलवाने और इसे लोगों के लिए शुरू कराने की मांग की है।

बस्ती के साउघाट में बारिश से धान की फसल खराब:किसानों ने बताया, कटाई के लिए तैयार धान को आंधी-तूफान से नुकसान

बस्ती के साउघाट के कई इलाकों में बारिश और आंधी-तूफान से धान की फसल को नुकसान हुआ है। कटाई के लिए तैयार धान की फसल खराब हो गई है।
स्थानीय निवासी विपिन कुमार, रामकेश, मनोज कुमार, अवधेश कुमार और अंकित कुमार ने बताया कि बारिश से किसानों को नुकसान हुआ है।
खेतों में पानी होने के कारण धान की फसल हो गई एकदम खराब जिससे किसान भाई है चिंतित में भगवान हमेशा किसानों के ऊपर पानी फेर देते हैं और सब्जियों की फसलों को भी हो रहा है नुकसान आलू टमाटर गोभी बैगन भिंडी सब फसलों का हो रहा है नुकसान
उन्होंने कहा कि आगे भी बारिश होने पर खेतों में पानी भर सकता है।

इस बार रिकॉर्ड 50 दिनों तक चलेगा जनगणना का चरण, पिछली बार के मुकाबले क्या होगा अलग?

0

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जनगणना 2027 का जनसंख्या गणना चरण पिछली जनगणनाओं की तुलना में अधिक लंबा चलेगा। यह 10 जनवरी से 28 फरवरी तक लगभग डेढ़ महीने तक चलेगा, जिसमें 15 दिन की स्व-गणना की अवधि भी शामिल है। इसके विपरीत पहले के चरण-2 की अवधि 20 दिन की होती थी जो आमतौर पर 9 फरवरी से 28 फरवरी तक चलती थी।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब जैसे चुनावी राज्यों के लिए पहले घोषित की गई घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की प्रक्रिया 35 दिनों तक चलेगी। इस लंबी अवधि का कारण यह हो सकता है कि 2011 की जनगणना में पूछे गए 29 सवालों की तुलना में 2027 की जनगणना के दूसरे चरण में सवालों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है, जिसमें जाति से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।

मणिपुर में नहीं की गई जनगणा की घोषणा

मणिपुर में जनगणना की घोषणा नहीं की गई है। राज्य में जनगणना की प्रक्रिया को तब रोक दिया गया था, जब वहां के विभिन्न वर्गों ने मांग की कि पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (एनआरसी) की प्रक्रिया पूरी की जाए।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, देश भर में जनसंख्या जनगणना की जाएगी। यह जनगणना 25 जनवरी से 27 फरवरी 2027 तक होगी।

हालांकि, इसमें कुछ अपवाद हैं: मणिपुर (अगली घोषणा तक), गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड (जहां अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इसे पहले ही आयोजित किया जा चुका है), लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के बर्फबारी वाले और अलग समय-सारणी वाले इलाके (जहां जनगणना पहले ही पूरी हो चुकी है)।

स्व-गणना का समय कितना होगा?

इससे पहले 10 से 24 जनवरी तक स्व-गणना का समय होगा। जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि पहले ही 1 मार्च, 2027 तय की जा चुकी है और 1 से 5 मार्च, 2027 तक एक पुनरीक्षण दौर चलाया जाएगा।

जनगणना के दूसरे चरण में जुटाई जाने वाली नई जानकारियों में जाति, जीवनसाथी का नाम, माता-पिता का विवरण, व्यक्ति की बताई गई राष्ट्रीयता, स्थायी पता, कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की कुल संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी नंबर, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस होने या न होने की जानकारी शामिल है।