जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधएन ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर जन संसद बुलाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जन महाभियोग के प्रस्ताव पारित करते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय और राज्य चुनावों का चुराने की भाजपा द्वारा रची गई बुरी और आपराधिक साजिश में सीईसी ने भागीदारी की। इसलिए ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाते हुए उनके खिलाफ “देशद्रोह” का मुकदमा चलना चाहिए।
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एसआईआर को वोट चोरी की धांधली बताते हुए आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार सीधे-सीधे मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं जिससे लोगों का वोट देने का अधिकार खतरे में है।
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सीईसी पर जन महाभियोग में छह मुख्य आरोप लगाते हुए खरगे ने दावा किया कि मोदी सरकार लगातार सत्ता में बने रहने के लिए सांसदों-पार्टियों को तोड़ने, सीबीआई-ईडी के बाद अब सत्ता में बने रहने के लिएएसआईआर का इस्तेमाल कर रही है।

विपक्ष की वोट चोरी मुद्दे पर रामलीला मैदान में आज हाेने वाली रैली से पूर्व इस जन संसद का संचालन पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने किया जिसमें आईएनडीआईए ब्लॉक के सांसदों-नेताओं, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के साथ एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए गए कुछ पीड़ित मतदाताओं ने हिस्सा लेते हुए अपनी बात रखी।

खुले लान में आयोजित इस जनसंसद में बैठने की व्यवस्था कुछ पुराने संसद भवन की शैली में की गई थी। मीरा कुमार का संचालन मंच भी स्पीकर के आसान की तर्ज पर बनाया गया था। खरगे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग प्रस्ताव पढ़ते हुए एसआईआर और चुनावी गड़बड़ियों की बात रखते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर कानून तोड़ा है और चुनावी प्रक्रिया पर सुनियोजित हमले को अंजाम देने के दोषी हैं जो देश के लोकतंत्र की नींव है।

सीईसी का काम आपराधिक कृत्य है और यह संविधान के खिलाफ देशद्रोह है। इस जनसंसद में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, शशि थरूर, मनीष तिवारी, पी चिदंबरम, जयराम रमेश से लेकर सपा, टीएमसी, शिवसेना यूबीटी के नेता अग्रिम पंक्तियों में बैठे थे जिसमें राजद नेता तेजस्वी यादव भीा शामिल थे।

हालांकि इस जन संसद में सत्तापक्ष का कोई प्रतीक नहीं था और कार्यवाही शुरू करते हुए मीरा कुमार ने एसआईआर में लोगों के वोट के अधिकार छीने जाने पर गंभीर चिंता जताते हुए इस जन महाभियोग को अहम करार दिया। इसके बाद राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता खरगे ने अपनी बात रखते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग प्रस्ताव पेश किया।
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एसआईआर को घोटाला बताते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह मुख्य आरोप लगाए। पहला, सीईसी ने चुनाव चुराने की साजिश रची। महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार आदि को इसका उदाहरण बताया।
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दूसरा एसआईआर में 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए। तीसरा संसद की निगरानी या जानकारी के बिना ‘फॉर्म 6’ में बदलाव किया। चौथा, इसीआइनेट के जरिए पूरे देश की मतदाता सूचियों पर कब्जा कर लिया और जब जरूरत हुई तो नाम जोड़ लिए और फिर हटा दिए।
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पांचवा आरोप कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों को प्रक्रिया से बाहर रख एकतरफा गैरकानूनी तरीके से फैसले लिए। खरगे ने छठा आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार बतौर सीईसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृहमंत्री इशारे के इशारे पर काम कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, सागरिका घोष ने बंगाल में एसआईआर में धांधली का आरोप लगाते हुए विधानसभा चुनाव रद किए जाने की मांग की।
सपा के राजीव राय, हरेंद्र मलिक, मॉकपा के जान ब्रिटास, आरएसपी के प्रेमचंद्रन जैसे विपक्षी दलों के सांसदों के अलावा कई सिविल सोसाइटी के लोगों ने एसआईआर के खिलाफ अपनी बात रखते हुए ज्ञानेश कुमार को हटाने के साथ ही उन्हें जेल भेजने की पूरजोर मांग की।