न्यूयॉर्क। वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित भौतिकी का नोबेल पुरस्कार अंटार्कटिका स्थित आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में किए गए अभूतपूर्व कार्यों और उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए प्रोफेसर फ्रांसिस हैल्ज़न को प्रदान किया गया है। यह सम्मान ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमय कणों के अध्ययन और उन्हें बर्फ की गहराइयों में तलाशने की अनूठी उपलब्धि का प्रतीक है।
ब्रह्मांड का सबसे शर्मीला कण और न्यूट्रिनो का रहस्य
न्यूट्रिनो एक ऐसा सब-एटॉमिक कण है, जिसे ब्रह्मांड का सबसे शर्मीला कण माना जाता है। इसका न तो कोई विद्युत आवेश होता है, न स्पष्ट द्रव्यमान और न ही कोई आकार। यह किसी भी वस्तु या हमारे शरीर के आर-पार इतनी आसानी से निकल जाता है कि इसे महसूस करना असंभव है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य से हर सेकंड अरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर से गुजरते हैं। इन कणों में ब्लैक होल, सुपरनोवा विस्फोटों और सक्रिय आकाशगंगाओं से जुड़ी अनमोल खगोलीय जानकारियां छिपी होती हैं, लेकिन इन्हें पकड़ना एक बेहद कठिन चुनौती था।
अंटार्कटिका की बर्फ में न्यूट्रिनो खोजने का अनूठा विचार
इसी चुनौती से पार पाने के लिए प्रोफेसर फ्रांसिस हैल्ज़न को 1980 में एक क्रांतिकारी विचार आया कि इन न्यूट्रिनो को बर्फ में पकड़ने की कोशिश की जाए। उन्होंने अनुमान लगाया कि जब न्यूट्रिनो पारदर्शी बर्फ के परमाणुओं से टकराएंगे, तो एक हल्की चमक यानी प्रकाश उत्पन्न होगा। इस प्रयोग के लिए अंटार्कटिका की गहरी, स्थिर और अत्यंत पारदर्शी बर्फ सबसे आदर्श साबित हुई, जहाँ हमेशा अंधेरा रहता है और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है।
आइसक्यूब वेधशाला का निर्माण और तकनीकी विशेषताएँ
वर्ष 1988 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत गर्म पानी से बर्फ में सैकड़ों मीटर गहरे छेद किए गए और उनमें सेंसरों की तारें डाली गईं। शुरुआती एएमएएनडीए डिटेक्टर के बाद, विशाल आइसक्यूब वेधशाला का निर्माण किया गया, जो 1 वर्ग किलोमीटर बर्फ को डिटेक्टर के रूप में उपयोग करती है। इसमें 86 केबलों पर 5,000 से अधिक सेंसर लगाए गए हैं जो हल्की रोशनी को पकड़कर विद्युत तरंगों में बदलते हैं।
खगोल विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत
वर्ष 2011 में पूरी तरह तैयार हुई इस वेधशाला ने 2013 में पहली बार उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को सफलतापूर्वक समझा। इस खोज से यह जानने में मदद मिली है कि सूर्य के भीतर ऊर्जा कैसे बनती है और ब्रह्मांड की शक्तिशाली खगोलीय घटनाएं कैसे कार्य करती हैं। वर्तमान में वैज्ञानिक यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये न्यूट्रिनो मूल रूप से कहाँ से आते हैं, जिससे प्रारंभिक ब्रह्मांड की भौतिकी को समझने के नए रास्ते खुल गए हैं।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026























