जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आकर राजस्थान में रह रहे विस्थापितों को रियायती दरों पर आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि विस्थापित परिवारों के बच्चों को केवल आधार कार्ड या किसी अन्य अनिवार्य पहचान पत्र के अभाव में सरकारी स्कूलों में प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा।
न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने विस्थापित हिंदू पुनर्वास समिति की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों को राज्य सरकार के सक्षम अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी लेकर इन निर्देशों को चार सप्ताह के भीतर लागू करने को कहा है।
राजस्थान में सबसे अधिक विस्थापित जोधपुर में हैं। इसे देखते हुए कोर्ट ने जोधपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम को विशेष निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न और विषम परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में परिवार भारत आकर राजस्थान में रह रहे हैं।
याचिका में जोधपुर विकास प्राधिकरण की विनोबा भावे नगर योजना में विस्थापित परिवारों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण भूखंड की कीमत का भुगतान आसान किश्तों में करने की अनुमति भी दी जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर और जयपुर जिलों में करीब 30 हजार पाकिस्तानी विस्थापित रह रहे हैं। इसके अलावा बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए विस्थापितों की संख्या भी एक हजार से अधिक बताई गई है।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026




















