नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने गुरुवार को राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोशिशें बेकार हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण को लेकर अदालत सवाल करना चाहती है। उन्होंने संकेत दिया कि संबंधित याचिकाकर्ता को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में आज किन चार मामलों पर सुनवाई?
अदालत में SIR और विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़े चार प्रमुख मामलों पर सुनवाई होनी है। इनमें मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनौती देने से लेकर प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और अदालत परिसर के कथित राजनीतिक इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिका
12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने SIR के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इसके बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में 13 याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अदालत का रुख किया। इस याचिका में SIR प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
2. प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ा मामला
10 अक्टूबर को हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो सेवाएं बंद किए जाने और महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे मुद्दों को लेकर भी याचिका दायर की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कथित अवमानना का आरोप लगाते हुए मामले की सुनवाई की मांग की गई है।
3. असदुद्दीन ओवैसी की SIR के खिलाफ याचिका
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की गई है। अदालत इस याचिका पर भी सुनवाई करेगी।
4. सुप्रीम कोर्ट परिसर में मार्च और कथित हंगामे का मामला
एक अन्य याचिका में विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और परिसर में हुए कथित हंगामे पर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अदालत परिसर का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। साथ ही, संबंधित नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग भी की गई है।
अदालत की टिप्पणी से बढ़ी मामले की अहमियत
SIR और विरोध मार्च से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अदालत परिसर में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। अब इन मामलों में अदालत का रुख और संबंधित पक्षों के जवाब आगे की सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026




















