‘लंबी कानूनी लड़ाई से खत्म नहीं होता मकान मालिक का हक’, 40 साल पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार को मकान खाली करने का दिया आदेश

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी किरायेदार के खिलाफ दशकों तक चलने वाली कानूनी लड़ाई का यह मतलब नहीं है कि मकान मालिक की अपनी संपत्ति पाने की वास्तविक और जायज जरूरत खत्म हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से जुड़े करीब 40 साल पुराने मकान मालिक किरायेदार विवाद का निपटारा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश रद्द कर दिया और किरायेदार को संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया।

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निचली अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए बेदखली के आदेश को पूरी तरह बहाल कर दिया।

पीठ ने कहा, ‘समय बीतने के साथ शुरुआती तकनीकी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और अदालतों में लंबे समय तक खिंचने वाला मुकदमा मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता को समाप्त नहीं कर सकता।’

क्या है पूरा मामला?

मकान मालिक ने जुलाई 1984 में इस संपत्ति का मालिकाना हक हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश शहरी भवन अधिनियम 1972 के तहत किरायेदार को नोटिस भेजा और तीन साल के अंदर जगह खाली करने के लिए कहा। 1998 में तय अथॉरिटी के सामने भरोसा दिलाने के बावजूद किरायेदार ने जगह खाली नहीं की।

मकान मालिक ने 2010 में बेदखली की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने बेटे जो एक न्यूरोसर्जन हैं, के लिए मेडिकल क्लिनिक खोलने के वास्ते इस जगह की जरूरत हैं।

दिसंबर 2012 में, अथॉरिटी ने मकान मालिक की जरूरत को सही माना और बेदखली का आदेश दिया। अपीलीय अथॉरिटी ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।

हाई कोर्ट ने दिया था दखल, SC ने बताया न्याय का उपहास

किरायेदार ने इसके खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने मार्च 2025 में निचली अदालतों के आदेशों को रद्द कर दिया, जिसके बाद मकान मालिक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि मकान मालिक ने 1984 में संपत्ति खरीदी थी और 1986 से मुकदमा लड़ रहे हैं। पिछले 40 सालों से संपत्ति खाली न होने के कारण मकान मालिक का बेटा अपना क्लिनिक तक शुरू नहीं कर सका।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2023 के एक फैसले का उल्लेख किया, जिसमें 38 साल तक मुकदमा लंबित रहा था। पीठ ने कहा कि चार दशक की लंबी मुकदमेबाजी के बाद यदि बुजुर्ग मकान मालिक से नए सिरे से कानूनी प्रक्रिया शुरू करने को कहा जाए, तो यह न्याय का उपहास होगा।

30 दिनों के अंदर संपत्ति खाली करने का निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कड़े निर्देश जारी किए। किराएदार को आदेश के 30 दिनों के अंदर मकान मालिक को संपत्ति का शांतिपूर्ण और खाली कब्जा सौंपना होगा।

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