डिजिटल डेस्क, कोच्चि। केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी है। उनके नाबालिग बेटे पर 25 अक्टूबर को एक स्कूटर सवार को टक्कर मारकर उसकी हत्या करने का आरोप है। यह पूरा मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह दुर्घटना 25 अक्टूबर की तड़के चेरानेल्लूर के पास हुई थी। एक तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार ने 54 वर्षीय एक व्यक्ति के दो-पहिया वाहन को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। आरोप है कि उस समय कार जज का नाबालिग बेटा चला रहा था। पुलिस ने इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?
मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने राज्य सरकार और पुलिस से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि जब जांच अधिकारी जज के घर की तलाशी ले चुके हैं और जरूरी सामान जब्त कर चुके हैं, तो फिर उनकी गिरफ्तारी की जिद क्यों की जा रही है?
‘जज जांच में सहयोग क्यों नहीं करेंगे?’
इतना ही नहीं अदालत ने पुलिस की कस्टडी की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि मान लेते हैं कि आपके सभी आरोप इस स्तर पर सही हैं और BNS की धारा 105 जैसी धाराएं भी बनती हैं, फिर भी आप उन्हें गिरफ्तार क्यों करना चाहते हैं?
कोर्ट ने जोर देते हुए टिप्पणी की कि क्या आपका यह मतलब है कि वह केवल हिरासत में ही सच बोलेंगे? यह एक वकील के मुंह से सुनना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि क्या एक जिला जज होने के नाते वह जांच में सहयोग नहीं करेंगे? फिलहाल अदालत ने इन तमाम टिप्पणियों के साथ आरोपी न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी है, जिससे पुलिस की हिरासत में पूछताछ की मांग पर रोक लग गई है।
