नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपित उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय के आदेश से बंधा है और न्यायिक अनुशासन का पालन करना जरूरी है।
इसके पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने 4 जुलाई को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने कहा था कि वो उच्चतम न्यायालय के 5 जनवरी के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य हैं। कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा था कि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं ट्रायल कोर्ट में भी सुनवाई योग्य नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान उमर खालिद की ओर से पेश वकील त्रिदिप पेस ने कहा था कि उच्चतम न्यायालय ने अंद्राबी के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज करने पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि उच्चतम न्यायायलय का वह आदेश जिसमें गवाहों के बयान दर्ज नहीं होने की स्थिति में एक साल के बाद जमानत याचिका दायर करने को कहा था, अब लागू नहीं होता।
पांच जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। पांच जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने जिन पांच आरोपितों जमानत दी थी, उनमें गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान शामिल हैं। उसके बाद उच्चतम न्यायालय ने 22 मई को आरोपितों खालिद सैफी और तसलीम अहमद को छह महीने की अंतरिम जमानत दी। इस मामले के चार आरोपितों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। जिन आरोपितों को पहले जमानत मिल चुकी है उनमें सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तान्हा, देवांगन कलीता और नताशा नरवाल शामिल हैं।











































