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51 दिन, 251 जड़ी-बूटियां और डेढ़ किलो सोना, दादा धूनी दरबार में हुआ विशेष यज्ञ

उदयपुरा। रायसेन जिले के उदयपुरा स्थित प्रसिद्ध दादा धूनी दरबार में संपन्न हुए 51 दिवसीय भव्य धार्मिक अनुष्ठान में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की। इस वृहद आयोजन के दौरान यज्ञ धूनी में अभूतपूर्व सामग्री की आहुतियां समर्पित किए जाने का दावा किया गया है, जिसमें 1 लाख 51 हजार किलोग्राम फल-फूल, मिष्ठान, वस्त्र, 251 प्रजातियों की दुर्लभ जड़ी-बूटियां, डेढ़ किलोग्राम स्वर्ण तथा 4 किलोग्राम से अधिक रजत आभूषण सम्मिलित हैं।

दादा धूनी वाले महाराज की कृपा से संपन्न हुआ आयोजन

आयोजनकर्ता संत शिवानंद महाराज ने बताया कि अनुष्ठान के दौरान लगभग डेढ़ किलो सोना और 4 से 5 किलो चांदी के आभूषण धूनी माता को अर्पित किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस प्रकार के विशाल आयोजनों हेतु किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था से चंदा या आर्थिक सहायता स्वीकार नहीं करते हैं। यह संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान दादा धूनी वाले महाराज के दिव्य आशीर्वाद से ही निर्विघ्न संपन्न होता है।

अन्नक्षेत्र एवं आभूषण भस्म विसर्जन की परंपरा

51 दिनों तक चले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे अखंड भंडारे (प्रसादी) की व्यवस्था रही। संत शिवानंद महाराज के अनुसार, धूनी में अर्पित किया गया स्वर्ण एवं रजत अग्नि में पूरी तरह भस्म में परिवर्तित हो जाता है, जिसे पश्चात पवित्र मां नर्मदा के जल में पूर्ण श्रद्धा के साथ विसर्जित कर दिया जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि यह धार्मिक अनुष्ठान 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर से प्रारंभ होकर 17 सितंबर तक संचालित हुआ। इसके उपरांत 21 दिवसीय नर्मदा संकीर्तन का आयोजन 8 अक्टूबर तक जारी रहेगा।

21 करोड़ रुपये के पुरस्कार का दावा

आयोजन के दौरान संत शिवानंद महाराज को 'इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने का दावा भी किया गया है। संत ने वक्तव्य दिया कि यदि विश्व में कोई अन्य व्यक्ति इस स्वरूप और पैमाने का धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करके दिखाता है, तो वे उसे 21 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान करेंगे।

आस्था और परंपराओं का समागम

संत शिवानंद महाराज ने कहा कि वे बाल्यावस्था से ही दादा धूनी वाले महाराज और मां नर्मदा की अनुकंपा से इस प्रकार के आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित करते आ रहे हैं और भविष्य में भी यह क्रम निरंतर जारी रहेगा। उनका मानना है कि धूनी साक्षात मां नर्मदा का ही स्वरूप है, इसलिए उसमें वस्त्र, स्वर्ण एवं रजत आभूषण श्रृंगार भाव से अर्पित किए जाते हैं। यद्यपि, इन धार्मिक मान्यताओं और आयोजकों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है; इसे श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के रूप में देखा जा रहा है।