श्रावस्ती में आभूषण और मिट्टी के दीपकों की बिक्री घटी:मोमबत्ती और इलेक्ट्रॉनिक झालरों के बढ़ते चलन से विक्रेताओं में मायूसी

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श्रावस्ती में धनतेरस से लेकर दीपावली के दिन रविवार शाम 6 बजे तक जिले के बाजारों में चहल-पहल रही। आतिशबाजी, गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटी। हालांकि, महंगाई के चलते आभूषण और मिट्टी के दीपकों की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। खासकर मिट्टी के दीपक बेचने वाली मुस्लिम महिला विक्रेताओं के चेहरे पर मायूसी नजर आई। आभूषण दुकानदार सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार बिक्री कम रही। ग्राहक दुकानों पर पहुंचे, लेकिन खरीदारी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। सोने-चांदी की कीमतें अधिक होने के कारण लोगों ने कम खरीदारी की। मिट्टी के दीपकों की जगह मोमबत्तियों का बढ़ा चलन मिट्टी के दीपक बेचने वाली अकीदुल निशा ने बताया कि इस बार पिछले साल की तुलना में कम दीपक बिके हैं। लोग मिट्टी के दीपकों की जगह मोमबत्तियों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगल से लकड़ी मिलना भी मुश्किल हो गया है। मिट्टी और लकड़ी दोनों खरीदकर लानी पड़ती हैं। कच्चे माल की कीमत बढ़ने से दीपकों के दाम बढ़ाने पड़े हैं, जिसका असर बिक्री पर पड़ा है। एक अन्य महिला विक्रेता ने भी बिक्री कम होने की बात कही। उन्होंने बताया कि ग्राहक दीपकों को महंगा बताकर खरीदने से पीछे हट जाते हैं। मिट्टी और लकड़ी महंगी होने के कारण उन्हें भी कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक झालरों से भी प्रभावित हुई मांग महिला विक्रेताओं का कहना है कि महंगाई के साथ मोमबत्तियों और इलेक्ट्रॉनिक झालरों का इस्तेमाल बढ़ने से मिट्टी के दीपकों की मांग कम हो रही है। बाजार में आतिशबाजी और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही, जबकि आभूषण और मिट्टी के दीपकों का कारोबार अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

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