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Bahraich News:14 बीघा जमीन और चार पेड़ सरयू की धारा में समाए – 14 Bighas Of Land And Four Trees Were Swallowed By The Waters Of The Saryu

Bahraich News:14 बीघा जमीन और चार पेड़ सरयू की धारा में समाए - 14 Bighas Of Land And Four Trees Were Swallowed By The Waters Of The Saryu

बहराइच। सरयू का जलस्तर घटने के साथ गोलागंज कोठार गांव के पास कटान तेज हो गया है। बेलहा-बेहरौली तटबंध के 53वें किलोमीटर से गांव के बीच करीब 500 मीटर के दायरे में नदी तेजी से जमीन काट रही है। शुक्रवार रात से शनिवार तक नदी में चार पेड़ और करीब 14 बीघा खेती योग्य जमीन समा गई। कटान से ग्रामीणों में दहशत है। जिलाधिकारी को सूचना देने के बावजूद एसडीएम के गांव न पहुंचने से लोगों में नाराजगी है।

शनिवार भोर में राजकुमार वर्मा के बाग के चार पेड़ नदी की धारा में समा गए। वहीं, राजेश, शिवकुमार, राधेश्याम और सुनील समेत अन्य ग्रामीणों की करीब 14 बीघा खेती योग्य जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों को आशंका है कि कटान नहीं रुका तो नदी की धारा आबादी की ओर बढ़ सकती है।

राजेश वर्मा, शिवकुमार वर्मा, राधेश्याम, सुनील, रामचंद्र, शिवनाथ और शिवराम ने जिलाधिकारी राजेश पांडेय को फोन कर स्थिति की जानकारी दी थी। ग्रामीणों के अनुसार, डीएम ने एसडीएम को गांव भेजकर हालात का जायजा लेने और आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देने की बात कही थी।

हालांकि, 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी एसडीएम के गांव न पहुंचने से ग्रामीणों में रोष है। लगातार हो रहे कटान से खेतों के साथ आबादी पर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने जल्द कार्यवाही न होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

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गांव को कटान से बचाने के लिए काम शुरू

सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा ने बताया कि गांव को कटान से बचाने के लिए परियोजना तैयार कर काम शुरू करा दिया गया है। 53वें किलोमीटर से गोलागंज कोठार गांव के बीच करीब 500 मीटर क्षेत्र में छह मिनी कटर बनाए जाएंगे। इनके बीच करीब 90-90 मीटर की दूरी रखी जाएगी। इसके अलावा तीन स्थानों पर बांस के सहारे और छह स्थानों पर वायर क्रेट लगाकर नदी की धारा को गांव से विपरीत दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जाएगा। बचाव कार्य में बालू की बोरियों और कंक्रीट का भी इस्तेमाल होगा। उन्होंने बताया कि कटान रोकने के लिए दिन-रात काम कराया जा रहा है। इसमें ग्रामीण भी सहयोग कर रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि तीन दिन के भीतर कटान पर अंकुश लगाया जा सके।

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