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ऋषि पंचमी पर महिलाओं ने की सप्तर्षियों की पूजा:श्रद्धापूर्वक सुनी व्रत कथा, शहर में दिखा उत्साह

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मंगलवार को शहर और आसपास के इलाकों में ऋषि पंचमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर महिलाओं ने विधि-विधान से व्रत रखा और वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज—इन सप्तर्षियों का पूजन किया। साथ ही सामूहिक रूप से कथा भी सुनी। सुबह से ही मंदिरों और घरों में पूजा शुरू हो गई थी। महिलाओं ने स्नान के बाद पूजा स्थल को गंगाजल से साफ कर हल्दी और रोली से चौक बनाए। इसके बाद सप्तर्षियों की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें फल, फूल, धूप, दीप और विशेष भोग लगाया। पूजा के दौरान महिलाओं ने एक जगह इकट्ठा होकर ऋषि पंचमी की पौराणिक व्रत कथा सुनी। पंडित जी ने कथा में बताया कि अनजाने में हुई शारीरिक और धार्मिक गलतियों (सूतक-पातक) के दोष दूर करने के लिए यह व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। कथा के दौरान ‘उत्तंक ब्राह्मण’ और उनकी पतिव्रता पत्नी ‘सुशीला’ के प्रसंग का वर्णन किया गया, जिसे महिलाओं ने बहुत ध्यान और भक्ति से सुना। शास्त्रों के मुताबिक, ऋषि पंचमी के व्रत में हल से जुते अनाज नहीं खाए जाते हैं। इसलिए महिलाओं ने पूरे दिन बिना कुछ खाए रहने के बाद शाम को पसाही चावल (तिन्नी का चावल), श्यामा चावल और बिना जुताई वाली सब्जियां खाकर अपना व्रत पूरा किया। कथा के आखिर में आरती उतारी गई और मौजूद सभी भक्तों को प्रसाद बांटा गया। पूजा में शामिल महिलाओं ने बताया कि यह व्रत न केवल धार्मिक रूप से खुद को शुद्ध करने का तरीका है, बल्कि ऋषियों और सनातन परंपरा के प्रति आभार जताने का पवित्र मौका भी है।

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