बस्ती समेत प्रदेश के 49 बस स्टेशनों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। परिवहन निगम ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। बस्ती बस स्टेशन के कायाकल्प पर करीब 88 करोड़ रुपये खर्च होंगे। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम करने वाली कंपनियों का चुनाव भी हो चुका है। अब चयनित बस स्टेशनों की मौजूदा स्थिति और संबंधित कंपनियों को स्टेशन सौंपे जाने की जानकारी जुटाई जा रही है। परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक (विपणन) अंकुर विकास ने दूसरे चरण में चुने गए 49 बस स्टेशनों को लेकर सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र में अधिकारियों से उनके क्षेत्र में आने वाले चयनित बस स्टेशनों की मौजूदा स्थिति की साफ रिपोर्ट देने को कहा गया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि पीपीपी मॉडल के तहत दूसरे चरण के लिए चुनी गई कंपनियों को संबंधित बस स्टेशन सौंपे गए हैं या नहीं। अगर सौंपने की प्रक्रिया पूरी हो गई है, तो उसकी स्थिति भी साफ करने के निर्देश दिए गए हैं। निगम ने अधिकारियों से मांगी गई जानकारी ई-मेल के साथ हार्ड कॉपी में भी देने को कहा है। पत्र के साथ पीपीपी मॉडल पर विकसित किए जाने वाले सभी 49 बस स्टेशनों की सूची भी भेजी गई है। इस सूची में बस्ती के साथ देवरिया और सोनौली बस स्टेशन भी शामिल हैं। पीपीपी मॉडल के तहत इन बस स्टेशनों के विकसित होने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही बस स्टेशन परिसर का व्यवस्थित विकास करने की योजना है।
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