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रायबरेली अदालत का फैसला, नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 7 साल की कैद, 3 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगा

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रायबरेली: अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (प्रथम) की अदालत ने नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए अभियुक्त को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की राशि अदा न करने पर दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

​अभियोजन पक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना वर्ष 2022 की है। क्षेत्र में रहने वाली एक दलित किशोरी के साथ आरोपी युवक ने बहला-फुसलाकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। घटना के संबंध में पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर संबंधित थाने में आरोपी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला दर्ज करने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और साक्ष्य जुटाए।

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​पुलिस की विवेचना टीम ने घटना से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण साक्ष्यों का संकलन किया और वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाते हुए त्वरित रूप से आरोप पत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किया। इसके बाद मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन आया, जहां सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

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​अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान दर्ज किए गए। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत के समक्ष पीड़िता के बयान, चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट और पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए फॉरेंसिक व अन्य भौतिक साक्ष्यों को मजबूती से रखा। बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए दलीलें पेश कीं, लेकिन प्रस्तुत किए गए मजबूत साक्ष्यों और गवाहियों के सामने उनकी दलीलें टिक न सकीं।

​मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (प्रथम) ने पत्रावली पर मौजूद तमाम साक्ष्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का गहनता से अनुशीलन किया। अदालत ने आरोपी धनंजय सिंह उर्फ जीतू सिंह को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया। इसके बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी धनंजय सिंह उर्फ जीतू सिंह को सात साल के कठोर कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया। फैसले के बाद दोषी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

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