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डूसू चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा

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  • 16 सितंबर को दो छात्र संगठनों ने की थी जमकर तोड़फोड़

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) चुनाव प्रचार के अंतिम दिन हुई हिंसा का मामला दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंच गया है। गुरुवार काे एक वकील ने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन करते हुए कहा कि डूसू का चुनाव 18 सितंबर को है और 16 सितंबर को जमकर तोड़फोड़ की गई है। उन्होंने आज ही इस मामले की सुनवाई करने की मांग की। उसके बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले पर आज ही सुनवाई करने का आदेश दिया।

डूसू चुनाव में 16 सितंबर को दो छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जमकर तोड़फोड़ की थी। 16 सितंबर को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था। डूसू का चुनाव 18 सितंबर को होना है। 16 सितंबर को उच्च न्यायालय ने इसी मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी राजनीतिक पार्टी के छात्र विंग का सदस्य होने के कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) चुनाव के उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उच्च न्यायालय ने डूसू चुनावों से जुड़े लिंगदोह कमेटी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाने वाली याचिका का निस्तारण करते हुए ये बातें कही थीं।

याचिका में कहा गया था कि यूनिवर्सिटी चुनाव के दौरान ने उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया है जिसमें कहा गया था कि चुनाव राजनीतिक दल के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एनएसयूआई, एबीवीपी, एएसएपी,एसएफआई, आईसा जैसे संगठनों ने पैनल जारी किया और डूसू चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। डूसू चुनाव में इस तरह का राजनीतिक समर्थन लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन है।