
बस्ती के परिवहन कार्यालय में फर्जी और गलत तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने के मामले में कार्रवाई हुई है। परिवहन आयुक्त कार्यालय के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट में 1017 ड्राइविंग लाइसेंस पहली नजर में फर्जी पाए गए हैं। विभाग ने सभी लाइसेंसों को निलंबित कर दिया है और अब उन्हें रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े डेटा और दस्तावेजों की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि 1017 लाइसेंस का बैकलॉग पहली नजर में फर्जी प्रतीत हो रहा है। आरोप है कि कार्यालय में काम करने वाली सेवा प्रदाता कंपनी के कर्मचारियों ने जरूरी दस्तावेजों की सही तरीके से जांच किए बिना ही इन लाइसेंसों की स्क्रूटनी कर दी। चार कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध जांच रिपोर्ट में सेवा प्रदाता कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत और साजिश के तहत प्रक्रिया को अंजाम दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग ने पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर वरिष्ठ सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) माला बाजपेयी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर सेवा प्रदाता कंपनी के चार कर्मचारियों पंकज यादव, प्रवीण यादव, अभय पाण्डेय और सुफियान अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले में मुकदमा अपराध संख्या 0381/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार मुकदमा 2 सितंबर 2026 को दर्ज हुआ। लाइसेंस रद्द करने की तैयारी जांच में पहली नजर में फर्जी अथवा गलत पाए गए सभी 1017 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। परिवहन विभाग अब इन लाइसेंसों को रद्द करने की कार्रवाई में जुटा है। वहीं, पुलिस की जांच के बाद आरोपित कर्मचारियों की वास्तविक भूमिका और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।






























