महराजगंज के सदर ब्लॉक क्षेत्र के पिपरा रसूलपुर, चेहरी, पकड़ी, बैजनाथपुर, कांधे और गोपी समेत आसपास के कई गांवों में धार्मिक आस्था और लोक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां महिलाओं ने अपने पुत्रों के दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए कुश की पूजा की। सुबह से ही गांवों के बाहर और अलग-अलग रास्तों पर महिलाएं हाथों में पूजा की थालियां लेकर मंदिरों और पूजा स्थलों की ओर जाती दिखीं। उनकी थालियों में महुआ का पत्ता, तिन्नी का चावल, दही, गुड़, हल्दी, चंदन, रोली, अगरबत्ती और कपूर जैसी कई पूजन सामग्रियां थीं। पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ महिलाओं ने मंदिरों और पूजा स्थलों पर पहुंचकर कुश की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने अपने पुत्रों के लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पीढ़ियों से चली आ रही इस विशेष पूजा को लेकर महिलाओं में खास उत्साह था। पिपरा रसूलपुर के साथ ही आसपास के अन्य गांवों में भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस धार्मिक परंपरा में हिस्सा लिया। पूजा के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय नजर आया। इस दृश्य ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी गांवों की धार्मिक परंपराएं और लोक आस्थाएं पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत हैं। रागिनी, अंजू, दुलारी देवी, आंचल, संतोषी सिंह, अनामिका चौहान, आकृति राजभर और माहेश्वरी देवी समेत कई महिलाओं ने बताया कि वे यह त्योहार अपने पुत्रों के सुख, शांति, समृद्धि और लंबी उम्र के लिए करती हैं, ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल और प्रगतिशील हो।
महिलाओं ने कुश की पूजा कर पुत्रों की लंबी उम्र:महराजगंज के कई गांवों में दिखा आस्था और परंपरा का अनूठा संगम
महराजगंज के सदर ब्लॉक क्षेत्र के पिपरा रसूलपुर, चेहरी, पकड़ी, बैजनाथपुर, कांधे और गोपी समेत आसपास के कई गांवों में धार्मिक आस्था और लोक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां महिलाओं ने अपने पुत्रों के दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए कुश की पूजा की। सुबह से ही गांवों के बाहर और अलग-अलग रास्तों पर महिलाएं हाथों में पूजा की थालियां लेकर मंदिरों और पूजा स्थलों की ओर जाती दिखीं। उनकी थालियों में महुआ का पत्ता, तिन्नी का चावल, दही, गुड़, हल्दी, चंदन, रोली, अगरबत्ती और कपूर जैसी कई पूजन सामग्रियां थीं। पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ महिलाओं ने मंदिरों और पूजा स्थलों पर पहुंचकर कुश की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने अपने पुत्रों के लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पीढ़ियों से चली आ रही इस विशेष पूजा को लेकर महिलाओं में खास उत्साह था। पिपरा रसूलपुर के साथ ही आसपास के अन्य गांवों में भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस धार्मिक परंपरा में हिस्सा लिया। पूजा के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय नजर आया। इस दृश्य ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी गांवों की धार्मिक परंपराएं और लोक आस्थाएं पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत हैं। रागिनी, अंजू, दुलारी देवी, आंचल, संतोषी सिंह, अनामिका चौहान, आकृति राजभर और माहेश्वरी देवी समेत कई महिलाओं ने बताया कि वे यह त्योहार अपने पुत्रों के सुख, शांति, समृद्धि और लंबी उम्र के लिए करती हैं, ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल और प्रगतिशील हो।
































