बृजमनगंज क्षेत्र में बारिश न होने से किसान परेशान हैं। उन्हें अपनी धान की फसल में पानी भरने के लिए डीजल इंजन चलाने पड़ रहे हैं। इससे उनकी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा डीजल पर खर्च हो रहा है, जिससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है। किसान चिंतित हैं क्योंकि फसलें सूख रही हैं। कई जगहों पर खैरारोग से भी फसलें झुलस रही हैं। जो धान की किस्में देर से तैयार होती हैं, वे पूरी तरह बर्बाद होने के कगार पर हैं। वहीं, जल्दी तैयार होने वाली फसलों में धान की बालियां तो निकल रही हैं, लेकिन उन्हें कीट-पतंगे काट रहे हैं। पानी की कमी से पैदावार में भी काफी नुकसान होगा। फसल को बचाने में फायदे से ज्यादा पूंजी लगानी पड़ रही है। किसान हर हाल में परेशान और मजबूर दिख रहा है, उसे प्रकृति का साथ भी नहीं मिल रहा। कई बार काले बादलों के गरजने की आवाज से लगता है कि बारिश होगी, लेकिन उम्मीदें सिर्फ उम्मीदें ही रह जाती हैं। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो किसान को एक चौथाई भी पैदावार नहीं मिल पाएगी। फसल बचाने में सामान्य से अधिक पूंजी लग जाएगी। किसान धान की फसल उगाने से लेकर कटाई तक लगने वाली सामान्य पूंजी का लगभग 70% खर्च कर चुका है। गेहूं की फसल की तुलना में धान की फसल काटने में ज्यादा खर्च आता है।



















