पुणे। महाराष्ट्र की राजनीति में पुणे शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के आगामी चुनावों को लेकर सरगर्मी काफी तेज हो गई है। राज्य के ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे के एक बयान ने महायुति गठबंधन के भीतर सियासी चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि महायुति गठबंधन इन दोनों सीटों पर एकजुट होकर चुनाव लड़ने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो बीजेपी अकेले दम पर भी चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेगी।
'महायुति के साथ तालमेल की कोशिश, पर विकल्प खुले'
पुणे शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों पर बोलते हुए जयकुमार गोरे ने कहा कि सत्तारूढ़ महायुति के रूप में मिलकर चुनाव लड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, यदि किसी कारणवश घटक दलों के बीच सहमति नहीं बन पाती है, तो बीजेपी दोनों सीटों पर अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण द्वारा लिया जाएगा। चूंकि पुणे क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अजित पवार गुट का भी अच्छा प्रभाव माना जाता है, इसलिए इस बयान के बाद अन्य सहयोगियों के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं।
रणजीतसिंह मोहिते पाटील पर साधा निशाना
पुणे के अलावा सोलापुर की राजनीति पर बात करते हुए जयकुमार गोरे ने बीजेपी नेता रणजीतसिंह मोहिते पाटील पर तीखा तंज कसा। उन्होंने मोहिते पाटील की राजनीतिक सक्रियता की तुलना 'बारिश आते ही छतरियां निकल आने' से की, जिसके बाद सोलापुर के सियासी गलियारों में भी घमासान मच गया है।
सोलापुर जिला बैंक चुनाव और आगे की रणनीति
लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद अब सोलापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव को लेकर भी जयकुमार गोरे और रणजीतसिंह मोहिते पाटील के बीच राजनीतिक मुकाबले के कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि, गोरे ने यह भी जोड़ा कि जिले के वरिष्ठ नेता बैठकर इस पर उचित निर्णय लेंगे और आवश्यकता पड़ने पर समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लेकर जिला बैंक पर बीजेपी का परचम फहराया जाएगा।
फिलहाल, जयकुमार गोरे के इन बयानों के बाद पुणे से लेकर सोलापुर तक राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है और अब सभी की निगाहें शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।














































