बस्ती के विक्रमजोत स्थित सहकारी गन्ना विकास समिति में रविवार को सट्टा प्रदर्शन और आपत्ति निवारण मेले का उद्घाटन किया गया। मेले का उद्देश्य किसानों के गन्ना सट्टे से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाना और गलतियों को समय रहते ठीक कराना है। किसानों को सलाह दी गई कि वे अपने सट्टे में दर्ज गन्ने से संबंधित सभी जानकारियों की बारीकी से जांच करें। यह मेला 21 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। किसानों से सीधे बातचीत कर सुनी गईं समस्याएं मेले के दौरान सहकारी गन्ना समिति के अध्यक्ष सिद्धांत सिंह और अरविंद सिंह मौजूद रहे। उन्होंने किसानों से बातचीत कर गन्ना सट्टे से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। किसानों ने अपने रिकॉर्ड और सट्टे से संबंधित दिक्कतें बताईं। अधिकारियों और समिति के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और उनका समय से निस्तारण कराया जाए। रकबा और गन्ने की प्रजाति जांचने की अपील किसानों से कहा गया कि वे अपने सट्टे में दर्ज गन्ने के रकबे की जांच जरूर करें। इसके साथ ही गन्ने की प्रजाति, पौधा या पेड़ी और अन्य दर्ज विवरण भी ध्यान से देखें। अधिकारियों ने कहा कि रिकॉर्ड में किसी तरह की गलती या जानकारी में अंतर मिलने पर किसान उसे नजरअंदाज न करें। गलती मिलने पर तय समय में दर्ज कराएं आपत्ति मेले में किसानों को बताया गया कि सट्टे में दर्ज किसी जानकारी में गलती मिलने पर तय समय के भीतर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। इसके बाद आवश्यक जांच के आधार पर रिकॉर्ड में सुधार कराया जाएगा। समिति की ओर से किसानों से अपील की गई कि अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय वे मेले में पहुंचकर पहले ही अपने रिकॉर्ड की जांच कर लें। चीनी मिलों के अधिकारी-कर्मचारी भी रहे मौजूद कार्यक्रम में डॉ. अरविंद सिंह, सचिव अंगद वर्मा और समिति के सभी सह-संचालक सदस्य मौजूद रहे। इसके अलावा रौजागांव, बभनान और मसौधा चीनी मिलों के अधिकारी-कर्मचारी भी मेले में शामिल हुए। समिति के कर्मचारियों ने किसानों की समस्याएं सुनने और सट्टे से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग किया। 30 सितंबर तक किसान करा सकेंगे सट्टे की जांच सहकारी गन्ना विकास समिति की ओर से सभी किसानों से 21 से 30 सितंबर तक चलने वाले मेले में पहुंचने की अपील की गई है। किसानों को अपने सट्टे का विवरण देखकर आवश्यक सुधार कराने का अवसर दिया जा रहा है। समिति का कहना है कि सही सट्टा तैयार होने से किसानों के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनी रहेगी और गन्ने की आपूर्ति प्रक्रिया भी सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी।
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