UP: रायबरेली जिला कारागार में महिला बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम शुरुआत हुई है। एनटीपीसी ऊंचाहार द्वारा अपने नैगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत जिला कारागार में महिला बंदियों के लिए मूंज शिल्पकला कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य महिला बंदियों को पारंपरिक मूंज कला में दक्ष बनाना और उन्हें रचनात्मक व आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के जरिए सशक्त करना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका रहीं। उन्होंने महिला बंदियों के कौशल विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एनटीपीसी की इस पहल की सराहना की। एनटीपीसी ऊंचाहार के कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख बिश्व मोहन सिंह ने बंदियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कौशल विकास न केवल आत्मविश्वास को मजबूत करता है, बल्कि यह भविष्य में एक स्वतंत्र और सम्मानजनक आजीविका कमाने का मार्ग भी प्रशस्त करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में पूरे उत्साह के साथ भाग लेने का आह्वान किया।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत महिलाओं को प्राकृतिक मूंज घास से विभिन्न प्रकार के आकर्षक, उपयोगी और सजावटी उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रयास महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है।कार्यक्रम के दौरान ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत एनटीपीसी ऊंचाहार के नव नियुक्त प्रशिक्षु अधिकारियों ने एक प्रेरक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से स्वच्छता, व्यक्तिगत व सामुदायिक जिम्मेदारी तथा स्वच्छ परिवेश के महत्व को समझाया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों द्वारा महिला बंदियों को भोजन के पैकेट और कंबल वितरित किए गए। अधिकारियों ने बंदियों से सीधे संवाद कर उनका मनोबल बढ़ाया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अंजुलता, जेल अधीक्षक प्रभात सिंह, जेलर हिमांशु रौतेला और अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) पंकज कुमार उपस्थित रहे। एनटीपीसी ऊंचाहार स्थानीय समुदायों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
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