महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े ओपेक अस्पताल कैली के बाल रोग विभाग में नवजात शिशुओं के इलाज में परेशानी आ रही है। यहां पोर्टेबल एक्सरे मशीन करीब एक महीने से खराब है, और एबीजी (आर्टेरियल ब्लड गैस) जांच भी नहीं हो पा रही है। इस वजह से डॉक्टरों को गंभीर नवजातों की बीमारी का सही पता लगाने और समय पर इलाज देने में दिक्कत हो रही है। जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण कुछ बच्चों को दूसरे बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ रहा है। पोर्टेबल एक्सरे मशीन बच्चों के फेफड़ों की जांच करती है, जबकि एबीजी जांच से खून में ऑक्सीजन का स्तर पता चलता है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अल्का शुक्ला ने बताया कि मशीन खराब होने की जानकारी अधिकारियों को दी जा चुकी है। डॉ. शुक्ला के मुताबिक, डॉक्टर उपलब्ध संसाधनों से इलाज कर रहे हैं और गंभीर बच्चों को रेफर किया जा रहा है। सवाल यह है कि एक महीने से खराब मशीन को ठीक कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है। अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं अस्पताल प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर मशीन की मरम्मत, एबीजी जांच की बहाली और नवजातों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि गंभीर बच्चों को समय पर इलाज मिल सके और परिजनों को रेफर के लिए भटकना न पड़े। ओपेक अस्पताल कैली के बाल रोग विभाग में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था नहीं है। कुर्सी बेंच की कमी के चलते परिजनों को जमीन पर बैठकर समय बिताना पड़ रहा है। बच्चों के इलाज के दौरान घंटों अस्पताल में रहने वाले तीमारदारों को इससे काफी परेशानी हो रही है। परिजनों ने विभाग में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था कराने की मांग की है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाक्टर मनोज कुमार ने बताया कि एक्सरे मशीन को ठीक कराने के लिए विभाग द्वारा लेटर बनाकर भेजा गया है।और जल्दी ही ठीक हो जायेगा।
ओपेक अस्पताल में एक महीने से पोर्टेबल एक्सरे-एबीजी जांच बंद:बस्ती में गंभीर नवजातों के इलाज में दिक्कत, अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान
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