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KMC मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने निकाली कैंसर जागरूकता रैली:लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज कराने की अपील की

महराजगंज कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय पर इलाज का महत्व समझाने के लिए केएमसी मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने बुधवार सुबह 11 बजे जागरूकता रैली निकाली। रैली के जरिए लोगों को कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और बीमारी के संकेत मिलने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने का संदेश दिया गया। मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल तक निकली रैली केएमसी मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए जिला अस्पताल पहुंची। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने लोगों से संवाद कर कैंसर के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि कैंसर का समय पर पता चलने और उचित उपचार मिलने से मरीज के स्वस्थ होने की संभावना बेहतर हो सकती है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें छात्र-छात्राओं ने लोगों को कैंसर के संभावित लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शरीर में असामान्य गांठ, लंबे समय तक न भरने वाला घाव, बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना या लगातार बनी रहने वाली परेशानी होने पर चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। हालांकि, ऐसे लक्षण होने का अर्थ हमेशा कैंसर होना नहीं है, लेकिन समय पर जांच कराना जरूरी है। भ्रांतियों से दूर रहने की अपील रैली के माध्यम से लोगों को कैंसर को लेकर भय और भ्रांतियों से दूर रहने का संदेश भी दिया गया। छात्र-छात्राओं ने अपील की कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों या झाड़-फूंक के भरोसे समय बर्बाद न करें। इसके बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर जरूरी जांच कराएं। जागरूकता से समय पर इलाज को मिलेगा बढ़ावा मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं की इस पहल का उद्देश्य समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को समय पर उपचार के लिए प्रेरित करना रहा। समय पर जांच, सही चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार इस बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बस्ती के पूर्षिया गांव में खड़ंजा सड़क पक्की बनी:गड्ढों से परेशान राहगीरों को अब आने-जाने में राहत मिली

बस्ती के पूर्षिया गांव में खड़ंजे की सड़क अब पक्की बन गई है। इससे लंबे समय से गड्ढों से परेशान राहगीरों को काफी राहत मिली है।
यह सड़क हाईवे गौरा से बांसी रोड बस्ती को जोड़ती है। पहले यह खड़ंजा सड़क टूटकर गड्ढों में बदल गई थी। दिन हो या रात, साइकिल और मोटरसाइकिल सवारों को आने-जाने में बहुत दिक्कत होती थी।
स्थानीय निवासी शिवकुमार, अजय कुमार, अनिल कुमार, विश्वजीत और महेश कुमार ने बताया कि खराब रास्ते के कारण उन्हें काफी परेशानी होती थी। अब सड़क पक्की बनने से गांव के लोगों में खुशी है।

NH 730 पर अज्ञात महिला का शव मिला:गिलौला के पास बाबा चौराहे पर राहगीरों ने दी सूचना, पुलिस को दुर्घटना का अंदेशा

नेशनल हाईवे 730 पर गिलौला के पास बाबा चौराहे पर एक अज्ञात महिला का शव मिला है। राहगीरों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस के अनुसार, पहली नजर में यह मामला दुर्घटना का लगता है। मोबाइल फॉरेंसिक टीम ने शव को कब्जे में ले लिया है और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
घटना की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।

‘फाइल फेंकने और दबाने वाले, ऑफिस में लेट आने वाले…’; कैबिनेट सचिव ने गिनाए 12 तरह के ब्यूरोक्रेट्स

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मंगलवार को परफॉरमेंस रिव्यू (कामकाज की समीक्षा) बैठक में एक ऐसी प्रेजेंटेशन दी, जिससे वरिष्ठ नौकरशाह () भी हक्के-भक्के रह गए।

टी.वी. सोमनाथन ने इस बैठक में ऐसे नौकरशाहों पर तंज कसा, जिससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि कई अधिकारी असहज हो गए होंगे।

कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने 12 तरह के नौकरशाहों पर एक प्रेजेंटेशन दिया। सोमनाथन की सूची में ऐसे अधिकारी शामिल थे जो महिला सहकर्मियों को कोई दस्तावेज दिखाने के लिए बहुत करीब आने को कहते हैं।

सोमनाथन ने उन अधिकारियों पर भी तंज कसा, जो फाइलें फेंकते हैं और बदतमीजी से बात करते हैं। इसके अलावा वो भी जो शनिवार को स्टाफ को तो बुलाते हैं, लेकिन खुद देर से आते हैं।

अन्य श्रेणियों में ऐसे अधिकारी भी शामिल थे जो शाम 7 बजे के बाद बैठकें बुलाते हैं, फाइलों को दबाकर (बिना आगे बढ़ाए) रखते हैं, या ऐसे फैसले मंत्रियों को भेज देते हैं जिन्हें वे खुद ले सकते थे।

टी.वी. सोमनाथन ने इन 12 तरह के नौकरशाहों पर प्रेजेंटेशन देने के लिए हर श्रेणी के साथ एक कार्टून भी दिखाया। बताया जा रहा है कि इनमें से कई कार्टून मशहूर कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण के बनाए हुए थे।

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर जोर

अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट सचिव का मुख्य संदेश यह था कि बैठकों को बेहतर तरीके से कैसे चलाया जाए और कार्यस्थल (वर्कप्लेस) को ऐसा कैसे बनाया जाए जहां काम आसानी से और अच्छे से हो सके।

टी.वी. सोमनाथन ने अधिकारियों को केंद्र सरकार की सुधारों की अगली कड़ी, ‘डिरैग्युलेशन 3.0’ (Deregulation 3.0) के बारे में भी बताया, जो जनवरी से शुरू होने वाली है।

इसका मकसद लालफीताशाही (red tape) को कम करना, नियमों का पालन आसान बनाना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार करने में आसानी) को बेहतर बनाना है।

1 से 10 नंबर के बीच में सही रैंकिंग

वरिष्ठ नौकरशाहों की बैठक में टी.वी. सोमनाथन ने मंत्रालयों के बीच आपसी बातचीत में तेजी लाने पर जोर दिया। सोमनाथन ने कहा कि केंद्रीय वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों को अपने विचार तुरंत भेजने चाहिए ताकि किसी तरह की देरी न हो।

कैबिनेट सचिव ने यह भी गौर किया कि अधिकारियों के परफॉरमेंस स्कोर अक्सर 1 से 10 के पैमाने पर 10 के बहुत करीब होते हैं। इससे रैंकिंग सिस्टम में ऐसे अधिकारियों को अलग करना मुश्किल हो जाता है जो वास्तव में बेहतरीन हैं, और उन अधिकारियों को अलग करना मुश्किल हो जाता है जिनका काम बस ‘संतोषजनक’ है।

‘हमारे सिस्टम में मुकदमे की प्रक्रिया ही सजा है…’, उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत पर SC के पूर्व जज की टिप्पणी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत में दोष सिद्ध होने या बरी होने से पहले का समय एक सजा बन जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रियाएं अपने आप में एक सजा का रूप ले सकती हैं। उन्होंने कहा कि जमानत मिलना एक सामान्य बात होनी चाहिए।

कुछ मामलों में आसानी से नहीं मिलती जमानत

पूर्व जज संजय किशन कौल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि जमानत के मामले में उनका नजरिया आमतौर पर उदार रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ कानून विशेष मामलों में जमानत देने पर स्पष्ट रूप से रोक लगाते हैं।

कानूनी प्रकिया ही सजा

पूर्व जज ने कहा कि जमानत के मामले में मेरा नजरिया हमेशा काफी उदार रहा है। मुझे लगता है कि जमानत मिलना सजा नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि सजा तो दोष सिद्ध होने पर मिलती है। दुर्भाग्य से, हमारी व्यवस्था में, दोष सिद्ध होने या बरी होने से पहले का समय ही एक सजा बन जाता है। पूरी कानूनी प्रक्रिया ही एक सजा बन जाती है।

कई जजों ने जताई चिंता

कौल ने बताया कि कई जजों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उन्होंने जस्टिस सुंदरेश के लिखे एक फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने जमानत के सवाल और हिरासत से जुड़े सिद्धांतों पर चर्चा की थी। उन्होंने बताया कि कई जज इस बारे में लिखते और बात करते रहे हैं।

उन्होंने बताया कि असल में, मैंने जस्टिस सुंदरेश के साथ मिलकर जमानत के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की थी। ये समझने की कोशिश की थी कि आखिर लोग हिरासत में क्यों हैं? 

जमानत मिलना सामान्य बात

कौल ने कहा कि मेरी नज़र में इस मामले में वे एक उदार जज हैं। हमने कुछ नियम वगैरह तय करने की कोशिश की, जो पहले से ही मौजूद थे। उन्होंने ताजा मामले पर हैरानी जताते हुए कहा कि इस मामले तक आते-आते देखिए।

31 अक्तूबर को रिलीज होगी किताब

कौल ने जय विनायक ओझा के साथ मिलकर ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ (Without Fear or Favour) नाम की एक किताब लिखी है, जो उनके संस्मरणों पर आधारित है। यह किताब 31 अक्टूबर को रिलीज़ होने वाली है।

बता दें कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश के आरोप में, खालिद और इमाम पर ‘गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।

ये दंगे ‘नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019’ और प्रस्तावित ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स’ (NRC) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। इस साल पांच जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दंगों के पीछे की कथित साजिश से जुड़े मामले में खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

बलहिखोर में 60 साल पुरानी परंपरा के साथ रावण दहन:विजयादशमी मेले का शुभारंभ, कल होगा विराट कुश्ती दंगल

निचलौल विकास खंड के बलहिखोर गांव में 60 साल पुरानी परंपरा के तहत विजयादशमी और रामलीला मेले का आयोजन किया जा रहा है। रावण दहन के साथ मेले की शुरुआत हुई, जिसमें खरीदारी और मनोरंजन के लिए कई दुकानें लगी हैं।
ग्राम प्रधान नागेश्वर सिंह ने बताया कि गांव में 24 अक्टूबर से रामलीला का मंचन हो रहा है। ग्रामीणों के सहयोग से यह आयोजन 60 सालों से लगातार हो रहा है।
गुरुवार को भारत मिलाप के साथ रामलीला खत्म होगी। इसी दिन एक विराट कुश्ती दंगल भी होगा। इसमें बिहार, नेपाल, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती और गोंडा के पहलवान हिस्सा लेंगे। आयोजन को सफल बनाने में गांव के सभी लोग सहयोग कर रहे हैं।

बस्ती में ग्राम प्रधान अमरनाथ चौधरी का निधन:बहन ने दी थी किडनी, नई स्कॉर्पियो लाए थे घर, क्षेत्र में शोक

दुबौलिया विकास क्षेत्र की डेईडीहा बुजुर्ग ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान अमरनाथ चौधरी का मंगलवार शाम करीब साढ़े आठ बजे निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे इलाके में शोक फैल गया। बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधाने लगे। जानकारी के अनुसार, अमरनाथ चौधरी की किडनी का प्रत्यारोपण हुआ था। उनकी बहन ने उन्हें किडनी दान की थी। उनकी देखभाल के लिए घर पर एक डॉक्टर भी रहता था। मंगलवार शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि अमरनाथ चौधरी मंगलवार को ही नई स्कॉर्पियो गाड़ी खरीदकर घर लाए थे। परिवार में सब कुछ ठीक था, लेकिन अचानक हुई इस घटना से खुशियां मातम में बदल गईं। अमरनाथ चौधरी अपने पीछे दो बेटे छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा अयोध्या में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है, जबकि छोटा बेटा इंजीनियरिंग कर रहा है। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

श्रावस्ती में पारिवारिक विवाद में बहू की हत्या:ससुर पर लकड़ी से सिर पर वार करने का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

श्रावस्ती में बुधवार सुबह 7 बजे पारिवारिक विवाद में ससुर ने बहु की मौत हत्या कर दी। आरोप है कि गुस्से में आकर ससुर ने लकड़ी से बहू के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। वारदात के बाद गांव में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। विवाद के दौरान सिर पर किया वार जानकारी के मुताबिक, सिरसिया थाना क्षेत्र के बनकटवा कला गांव निवासी सबीना (25) पत्नी सलमान का परिवार में विवाद हो गया था। इसी दौरान उसके ससुर मिराम अली ने कथित तौर पर गुस्से में आकर पास में पड़ी लकड़ी से सबीना के सिर पर वार कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण महिला की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस, जुटाए साक्ष्य घटना की जानकारी मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद सिरसिया थाना पुलिस और क्षेत्राधिकारी भिनगा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना से जुड़ी जानकारी जुटाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर रही है। पुलिस परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ के जरिए विवाद की वजह और वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाने में जुटी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना के संबंध में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

गैर हिंदुओं के मंदिर प्रवेश पर मद्रास हाईकोर्ट सख्त, बिना शपथ पत्र दिये ध्वज-स्तंभ से आगे जाने की इजाजत नहीं

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डिजिटल डेस्क, मदुरै। मद्रास हाईकोर्ट ने अपने ताजा फैसले में साफ किया कि गैर हिंदूओं को मंदिर में प्रवेश के लिए शपथ पत्र देना होगा। मद्रास हाई कोर्ट का ये फैसला गैर हिंदुओं के लिए है जो संबंधित देवता के प्रति श्रद्धा नहीं रखते हैं। उन्हें ही आगमिक हिंदू मंदिरों में बिना शपत्र पत्र के प्रवेश नहीं मिलेगी।

कोर्ट मदुरै के के. थंगम वेंकटेश की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये बातें कहीं। जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस पी. मुरुगन की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एक हिंदू हैं।

भंग होती है मंदिर की पवित्रता

याचिकाकर्ता को यह मांग करने का अधिकार है कि तमिलनाडु के कई आगमिक मंदिरों के ट्रस्टी आगमिक नियमों का पालन करें और ऐसे गैर-हिंदुओं को ध्वज-स्तंभ के आगे जाने से रोकें, जो इस संबंध में कोई शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) नहीं देते हैं। यदि उन्हें प्रवेश की अनुमति दी जाती है, तो इससे मंदिर की पवित्रता भंग होगी। 

श्रद्धा नहीं रखने पर प्रवेश की इजाजत नहीं

कोर्ट ने कहा कि हम इससे भी आगे जाकर कहते हैं कि जो गैर-हिंदू अपने धार्मिक प्रतीक धारण करते हैं और संबंधित देवता के प्रति श्रद्धा नहीं रखते, उन्हें मंदिर परिसर में भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

विधायक की हुई आलोचना

इस मामले में, जजों ने मदुरै सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र से टीवीके विधायक बदरुद्दीन मुस्तफा की कड़ी आलोचना की, क्योंकि उन्हें मीनाक्षी मंदिर के भीतर ‘निरीक्षण’ करते हुए देखा गया था।इसके साथ ही हाल ही में हुए मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान वे गोपुरम के ऊपर मौजूद थे।

चुनाव जीतने के बाद गए थे मंदिर

न्यायाधीशों ने कहा कि हाल के दिनों में हमने देखा है कि नियमों का घोर उल्लंघन हो रहा है। मदुरै सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र के विधायक बदरुद्दीन मुस्तफा चुनाव जीतने के तुरंत बाद मंदिर परिसर (मीनाक्षी मंदिर) के अंदर चले गए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें ये जांचने का अधिकार है कि वहां उचित सुविधाएं दी जा रही हैं या नहीं। वे कुम्भाभिषेकम के अवसर पर मंदिर के गोपुरम (शिखरों) पर भी चढ़ गए।

कोर्ट ने कहा कि ये विडंबना ही है कि उसी विधायक ने यह बयान दिया था कि सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए।

वायरल वीडियो पर संज्ञान

न्यायाधीशों ने बताया कि हमने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो पर संज्ञान लिया है। इस वीडियो में कुछ लोग सिर पर टोपी पहने तिरुवन्नामलाई अरुणाचलेश्वर मंदिर में जबरन घुसने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भक्त इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस दौरान हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के कर्मचारी मूकदर्शक बने रहे।

उन्होंने आगे कहा, “हमने इस बात पर भी संज्ञान लिया है कि ईसाई धर्म को मानने वाले एक मंत्री तिरुचेंदुर मंदिर में बिना वह शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) दिए प्रवेश कर गए, जो गैर-हिंदुओं के लिए अनिवार्य है।”

कोर्ट ने सीएम विजय की सराहना की

कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सराहना करते हुए कहा कि हमारे सामने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिन्होंने शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद देवी मीनाक्षी की पूजा की। ईसाई धर्म को मानने वाले मुख्यमंत्री से हिंदू धर्म अपनाने के लिए नहीं कहा गया था। उनसे केवल देवी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अनुरोध किया गया था। इसे ही हम ‘समावेशी दृष्टिकोण’ कहते हैं।

हवाई टिकट में खेल: अहमदाबाद-पुणे रूट पर अंतिम समय में बुकिंग करने पर 120 तक महंगी, बेंगलुरु-चेन्नई में सिर्फ 2.9 का इजाफा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप अपनी यात्रा से ठीक एक दिन पहले फ्लाइट का टिकट बुक करने की योजना बना रहे हैं, तो इसके लिए आपको कितना अधिक किराया चुकाना होगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका रूट कौन सा है।

टीओआई के अनुसार, 16 सितंबर 2026 की सुबह देश के 54 घरेलू रूट्स के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि जहां कुछ व्यस्त रूट्स पर एक दिन पहले और एक महीने पहले के किराए में लगभग कोई अंतर नहीं दिखा, वहीं कम उड़ानों वाले कई मार्गों पर किराया दोगुने से भी अधिक पहुंच गया।

कैसे काम करता है प्राइस इंडेक्स?

इस विश्लेषण में इस्तेमाल किया गया एयरलाइन प्राइस इंडेक्स यात्रा से ठीक एक दिन पहले के किराए को आधार यानी 100 मानकर काम करता है। बाकी सभी दिनों के किराए की तुलना इसी आधार से की जाती है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी रूट पर 30 दिन पहले की बुकिंग का इंडेक्स 45.4 दर्ज किया गया, तो इसका सीधा मतलब है कि एक महीने पहले टिकट बुक करने वाले यात्री ने आखिरी दिन के मुकाबले आधे से भी कम खर्च किया। यह इंडेक्स केवल किसी एक दिन की स्थिति नहीं, बल्कि एक लंबी अवधि में जुटाए गए रुझानों के आधार पर तैयार किया गया है।

फ्लाइट बुकिंग डेटा रूट वार

रूट एक दिन पहले बुकिंग पर अतिरिक्त खर्च (%) 30 दिन पहले बुकिंग पर बचत (%) प्रति दिन उड़ानें (आउटबाउंड)
अहमदाबाद से पुणे 120.5% 54.6% 3
कोलकाता से चेन्नई 112.7% 53.0% 3
कोलकाता से बेंगलुरु 93.2% 48.2% 9
कोलकाता से हैदराबाद 90.0% 47.4% 3
हैदराबाद से बेंगलुरु 86.6% 46.4% 11

किन रूट्स पर आखिरी वक्त की बुकिंग पड़ी सबसे महंगी?

विश्लेषण में शामिल 54 घरेलू रूट्स में से कुछ ऐसे मार्ग सामने आए जहां यात्रा की तारीख के नजदीक टिकट लेने पर भारी अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ी। अहमदाबाद से पुणे रूट पर सबसे बड़ा अंतर देखा गया, जहां यात्रा से ठीक एक दिन पहले टिकट बुक करने पर यात्रियों को 30 दिन पहले की तुलना में 120.5 प्रतिशत अधिक भुगतान करना पड़ा।

वहीं, एक महीने पहले बुकिंग करने पर 54.6 प्रतिशत तक की सीधी बचत दर्ज की गई। कोलकाता से चेन्नई रूट पर भी ऐसी ही स्थिति रही, जहां एक दिन पहले टिकट लेने पर 112.7 प्रतिशत का भारी प्रीमियम चुकाना पड़ा। इसके विपरीत, इसी रूट पर 30 दिन पहले टिकट बुक करने वाले यात्रियों ने करीब 53.0 प्रतिशत की बचत की।

इन रूट्स पर पहले और बाद के किराए में मामूली अंतर रहा

इसके विपरीत, देश के कुछ बेहद व्यस्त और अधिक उड़ानों वाले रूट्स पर यात्रा की तारीख नजदीक आने पर भी किराए में कोई बड़ा उछाल नहीं देखा गया।

बेंगलुरु से चेन्नई रूट पर 30 दिन पहले की गई बुकिंग और यात्रा से एक दिन पहले की बुकिंग में केवल 2.9 प्रतिशत का मामूली अंतर दर्ज हुआ, जहां पहले टिकट लेने पर केवल 2.8 प्रतिशत की ही बचत हुई।

मुंबई से दिल्ली जैसे देश के सबसे व्यस्ततम मार्ग पर, जहां रोजाना दर्जनों उड़ानें चलती हैं, 30 दिन पहले के मुकाबले एक दिन पहले टिकट लेने पर सिर्फ 6.9 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रीमियम लगा।

इसी तरह पुणे से दिल्ली मार्ग पर भी आखिरी वक्त में टिकट लेने पर केवल 7.2 प्रतिशत का अंतर देखने को मिला। इन रूट्स पर बुकिंग के समय का विज्ञापित किरायों पर बहुत सीमित असर पड़ा।

उड़ानों की संख्या तय करती है किराए का उतार-चढ़ाव

इस पूरे अध्ययन से यह साफ होता है कि केवल पहले से टिकट बुक कर लेना ही बड़ी बचत की गारंटी नहीं देता, बल्कि रूट और उस पर उड़ानों की संख्या सबसे अहम भूमिका निभाती है।

मुंबई-दिल्ली और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे अत्यधिक व्यस्त कॉरिडोर्स पर रोजाना दर्जनों उड़ानें संचालित होने के कारण सीटों की उपलब्धता बनी रहती है, जिससे किराए का ग्राफ लगभग स्थिर रहता है।

दूसरी ओर, जिन रूट्स पर सीमित उड़ानें संचालित होती हैं, वहां तारीख नजदीक आते ही बची हुई सीटों की मांग बढ़ जाती है और किराए में भारी उछाल आ जाता है।

हालांकि, ये आंकड़े एक तय दिन के विज्ञापित और औसत किरायों पर आधारित हैं, इसलिए वास्तविक टिकट दरें समय और मांग के अनुसार बदल सकती हैं।

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