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‘लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार, अराजकता फैलाना नहीं’, स्व. नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में बोले रक्षा मंत्री

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'लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार, अराजकता फैलाना नहीं', स्व. नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में बोले रक्षा मंत्री

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । पिछले कुछ दिनों से दिल्ली राजनीतिक दलों और कुछ संगठनों के प्रदर्शन के कारण बेहाल है। ऐसे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन ताकतों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है, अराजकता फैलना नहीं।

वोट चोरी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ पूरे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उनकी विश्वसनीयता को सुनियोजित ढंग से कमजोर करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है और उसने इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने का एलान किया है।

राजनाथ सिंह स्व. नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में “बदलती युवा पीढ़ी की आकांक्षा और नीति निर्माण” विषय पर बोल रहे थे। युवाओं को सरकार के साथ-साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ खड़ा करने की कोशिशों के प्रति आगाह करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि युवाओं को भले ही कुछ समय के लिए निहित स्वार्थ में भटका लें, लेकिन अंतत: वह राष्ट्र निर्माण में निश्चित रूप से जुटेगा।

उन्होंने कहा कि आज कई देशों में युवाओं को एक्सेसिव डिजिटल इंटरेक्शन के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। जैसे आस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सारे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म प्रतिबंधित कर दिए हैं। यूके स्वीडन और स्पेन में भी इसी तरह की कवायद की जा रही है।

हाल ही में, भारत में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट मीडिया के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित की जानी चाहिए। कुछ लोगों को इससे भी आपत्ति होगी। वे इसका भी विरोध करेंगे। लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम सभी स्टेकहोल्डर्स और एक्सपर्ट के साथ विचार-विमर्श करके, युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव प्रयास करेंगे।

मोदी सरकार के नीति निर्माण में युवाओं को अहमियत नहीं दिए जाने की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में ऐसा माहौल और नीतियां बनाने का काम किया गया है, जो युवाओं को अपने सपनों को पूरा कर अवसर प्रदान करता है।

इसी सोच के साथ माई भारत प्लेटफार्म शुरू किया गया, जो युवाओं को नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी से जोड़ रहा है। अब तक तीन करोड़ से अधिक युवा इससे जुड़ चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, खेलो इंडिया से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में उठाए गए कदमों को गिनाया।

उन्होंने कहा कि अकेले रक्षा क्षेत्र में एक हजार से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं जबकि पहले यह क्षेत्र पूरी तरह से सरकारी कंपनियों पर निर्भर था। आज हमारे युवा ड्रोन, मिसाइल, एंटी-ड्रोन सिस्टम और बुलेटप्रूफ जैकेट तक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह युवाओं के कौशल, कड़ी मेहनत और प्रतिभा के साथ-साथ अच्छी नीति के कारण संभव हुआ है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के विकास के लिए हमारी पालिसी कैसी हो, इसको बढ़ई और माली के उदाहरण से समझा जा सकता है। एक बढ़ई जानता है कि उसे क्या बनाना है। उसके दिमाग में पहले से ही एक तय डिजाइन होता है। वह लकड़ी को उस डिजाइन में ढालता है, जो उसने पहले से सोच रखा है। लेकिन एक माली किसी पौधे को आकार नहीं देता। बस पौधे को बढ़ने के लिए पानी देता है, खाद देता है, उसकी रक्षा करता है।

और फिर पौधा धीरे-धीरे अपनी प्रकृति के अनुसार विकसित होता है। मुझे लगता है कि एक अच्छी पब्लिक पालिसी का काम भी बढ़ई जैसा नहीं, बल्कि माली जैसा होना चाहिए। पालिसी का काम ऐसा वातावरण बनाना होना चाहिए जहां हर व्यक्ति अपनी प्रतिभा और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ सके और आज हमने इसी दिशा में काम किया है।

इसी कार्यक्रम में उन्होंने हिंदी के गीतकार बुद्धि्नाथ मिश्र को जागरण साहित्य सृजन सम्मान भी दिया। इसमें 11 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाता है।

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