
बस्ती जिले के हर्रैया विकास खंड का भीमलापुर छत्तर गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। देश जहां विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं यह ऐतिहासिक गांव शासन-प्रशासन की अनदेखी का शिकार है। इस गांव ने आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया था। भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानी स्व. राम नारायण शर्मा (पुत्र श्री रामदत्त शर्मा) इसी गांव के थे। उन्होंने 1943 में 26 दिनों तक जेल की यातनाएं सही थीं। गांव के प्रवेश द्वार पर उनका स्मारक द्वार बना है, लेकिन गांव की बदहाली उनके सम्मान पर सवाल उठाती है। गांव की प्रमुख समस्याओं में जर्जर सड़कें शामिल हैं। गांव की अंदरूनी और मुख्य सड़कें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी होती है। गांव का प्राचीन मंदिर भी जर्जर हालत में है। इसके परिसर में साफ-सफाई की कमी है। प्राथमिक विद्यालय के आसपास भी गंदगी और जलजमाव रहता है। गांव में बना कूड़ेदान बंद पड़ा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। गांव के बुजुर्ग श्रीकांत पांडे ने बताया कि आजादी के बाद से गांव में कोई खास विकास नहीं हुआ है। उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। गांव की इस हालत को लेकर स्थानीय निवासी पिंटू पांडे, संदीप शर्मा, रामविलास शर्मा, रोहित पांडे, अंशु पांडे, हरशंकर पांडे, अभिषेक पांडे, अमित पांडे और विकास पांडे सहित अन्य ग्रामीणों ने अपील की है। उन्होंने शासन-प्रशासन, स्थानीय विधायक और समाजसेवियों से गांव की सुध लेने को कहा है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव की सड़कों का निर्माण हो, विद्यालय और मंदिर परिसर की सफाई हो, और गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
































