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महराजगंज में ‘VBG राम जी’ योजना में धांधली, बिना मजदूर मस्टरोल पर लग रही फर्जी हाजिरी,सरकारी खजाने की लूट

रिपोर्ट:गजेंद्र गुप्त।

महराजगंज। भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘VBG राम जी’ में अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकार ने लूट रोकने के लिए मजदूरों का फेस कैप्चर (चेहरा स्कैनिंग) अनिवार्य किया था, लेकिन भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट ने इसका भी काट ढूंढ निकाला। बिना काम किए केवल कार्यस्थल पर फोटो खिंचवाने के नाम पर मजदूरों को ₹50 से ₹100 थमाए जा रहे हैं और खातों में रकम आने के बाद शेष धनराशि ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक डकार रहे हैं।

ताजा और चौंकाने वाला मामला निचलौल ब्लॉक के बड़हरा चरगहां ग्राम पंचायत का है,जहाँ धरातल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं है, लेकिन सरकारी कागजों में लाखों रुपये की हाजिरी जारी है।

कागजों में दौड़ रही कुदाल, मौके पर पसरा सन्नाटा।

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बड़हरा चरगहां में दो बड़े कार्यों के नाम पर सरकारी ध का बंदरबांट किया जा रहा है।महेश के खेत से नथुनी के खेत तक चकबंध कार्य लागत लगभग ₹2 लाख, रोजाना कागजों में 43 मजदूर कार्यरत।तो वही राजेन्द्र के खेत से महेश के खेत तक चकबंध कार्य लागत लगभग ₹2 लाख, रोजाना कागजों में 42 मजदूर कार्यरत।

हमारी मीडिया टीम ने जब कार्यस्थल की पड़ताल की, तो वहां की स्थिति देखकर होश उड़ गए। चकबंध के दोनों तरफ लहलहाती गन्ने की फसल खड़ी है और फसलों को बचाने के लिए कटीले नुकीले तार बंधे हैं। वहां आसपास एक तसला मिट्टी तक मिलने की गुंजाइश नहीं है। मजदूरों के सामने मजबूरी यह है कि आसपास उगी घास को छीलकर गड्ढे में डाल रहे हैं, क्योंकि अगर मिट्टी निकालने की कोशिश की तो कटीले तारों से लहूलुहान होना तय है।

जब रेड अलर्ट में पूरा जनपद सहमा था, तब फर्जी हाजिरी से खजाना लुट रहा था।

पड़ताल के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के कारण बीते तीन-चार दिनों से कोई काम नहीं हो रहा है। लेकिन जब मीडिया टीम ने सरकारी आंकड़ों का कच्चा चिट्ठा खंगाला, तो भ्रष्टाचार का घिनौना चेहरा बेनकाब हो गया।जिस दिन मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका को देखते हुए पूरा जनपद हाई अलर्ट पर था, लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी जा रही थी, उस दिन भी रोजगार सेवक सुनीता कुशवाहा के पति विश्वभर कुशवाहा बिना किसी मजदूर के पोर्टल पर धड़ाधड़ फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी खजाने पर डाका डाल रहे थे।

कैमरा देखते ही उड़े होश, फोन तक बंद।

रविवार को जब मीडिया टीम ने रोजगार सेवक के प्रतिनिधि विश्वभर कुशवाहा से जानकारी ली, तो उन्होंने बड़े दावे के साथ कहा, “मजदूर रोजाना सुबह 6 बजे आते हैं और दोपहर 1 बजे जाते हैं।”इस दावे की जमीनी हकीकत परखने के लिए हमारी टीम दोपहर 12:30 बजे ही कार्यस्थल पर पहुंची, तो मौके पर एक भी मजदूर नहीं मिला। जब सच्चाई उजागर करने के लिए विश्वभर कुशवाहा को फोन मिलाया गया, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा।वहीं ग्राम सभा प्रशासक राजकुमार कुशवाहा का बेतुका बयान सामने आया कि “हमारी ग्राम सभा में कोई गलत कार्य नहीं होता।” अब सवाल यह उठता है कि अगर बिना मजदूर के फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन हड़पना ‘सही काम’ है, तो फिर गलत काम किसे कहते हैं।बड़े सवाल यह कि नींद से कब जागेंगे जिम्मेदार

सिंडिकेट का सरगना कौन। 

जब एक आम नागरिक और मीडिया टीम को यह फर्जीवाड़ा साफ दिखाई दे रहा है, तो वातानुकूलित कमरों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की नजरों से यह कैसे छिपा है।

क्या कमीशनखोरी का खेल है।

क्या उच्चाधिकारियों की खामोशी इस बात का इशारा है कि इस बहती गंगा में ऊपर से नीचे तक सबकी हिस्सेदारी बंधी हुई है। फेस कैप्चर का ढोंग क्यों जब फेस ऐप को भी फर्जीवाड़े का जरिया बना लिया गया है, तो ऐसे तकनीकी तंत्र का क्या फायदा।बता दे कि यह मामला सिर्फ एक ग्राम सभा का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखाने वाले संगठित सिंडिकेट का है। अब देखना यह है कि इस पड़ताल के बाद जिला प्रशासन और आला अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर इन भ्रष्ट कारिंदों को संरक्षण देना जारी रखते हैं। यदि मामले में जल्द से जल्द जांच कर दोषियों पर कार्यवाही नहीं किया गया, तो यह मामला शासन स्तर तक उठाया जाएगा।