नई दिल्ली। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने ‘हवा का रुख भांपते हुए’ कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह नहीं चाहते थे कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व किसी भी तरह के दबाव में आए।
राजा वडिंग ने यहां पार्टी के सीनियर नेता राहुल गांधी को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद ये बातें कहीं। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस्तीफा किसी ने मांगा था या मैंने अपनी मर्जी से दिया… वैसे, किसी ने मेरा इस्तीफा नहीं मांगा था।”
उन्होंने कहा, “जैसे घर की बुज़ुर्ग महिलाएं हवा का रुख देखकर बता देती थीं कि बारिश होने वाली है और कपड़े भीगने से बचाने के लिए तैयारी कर लेनी चाहिए, वैसे ही मैंने भी हालात को बारीकी से समझा। नौबत कभी ऐसी नहीं आई कि किसी को मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहना पड़े। इसीलिए मैंने खुद ही अपने ‘एक्स’ बायो में पूर्व लिख दिया, ताकि ऐसी स्थिति ही न बने। भला वह कैसा नेता है जिसे हालात और परिस्थितियों का अंदाजा ही न हो? तो, किसी ने मेरा इस्तीफा नहीं मांगा, लेकिन हां, आज मैंने औपचारिक रूप से राहुल जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उनका आभार जताया है।”
इसके अलावा, उन्होंने पंजाब कांग्रेस में कथित खींचतान को लेकर किसी भी पार्टी नेता से बात करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मैंने किसी से बात नहीं की है, न तो प्रभारी सचिन पायलट से और न ही किसी और से। लेकिन मैंने सुना है कि शायद प्रभारी ने कहा था कि राजा वडिंग को बदलना होगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने सचिन पायलट के सामने अपना पक्ष रखा, तो राजा वडिंग ने कहा: “मैं अपना पक्ष सिर्फ एक व्यक्ति के सामने रखता हूं और वह हैं राहुल गांधी।”
क्या उनका इस्तीफा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस के अन्य नेताओं के कथित दबाव का नतीजा था, इस पर उन्होंने कहा कि मैं नहीं चाहता था कि कोई दबाव में आए… मैं नहीं चाहता था कि मेरे नेता पर ऊपर से कोई दबाव पड़े, इसलिए मैंने उससे पहले ही इस्तीफा दे दिया।”
आगे की योजना के बारे में वडिंग ने कहा कि फिलहाल वह गुरुद्वारे में ‘सेवा’ करेंगे और ध्यान लगाएंगे। उसके बाद पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, मैं उसे निभाऊंगा।












































