त्रिपुरा में BSF जवानों पर हमले के बाद सीमांकन की कवायद शुरू, आशाबाड़ी के पास अवैध कब्जे की जांच तेज

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डिजिटल डेस्क, अगरतला। त्रिपुरा के सोनामुरा उपमंडल के आशाबाड़ी में दो नवंबर को बीएसएफ जवानों और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़प के बाद जिला प्रशासन ने आशाबाड़ी सीमा चौकी (बीओपी) के आसपास भूमि सत्यापन और सीमांकन की कवायद शुरू की है। इससे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत को लेकर चिंता बढ़ी है।

सोनामुरा के उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के निर्देश पर बीएसएफ जवानों, पुलिस अधिकारियों व राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने गुरुवार को इलाके का दौरा किया। टीम में राजस्व निरीक्षक (आरआइ) और तहसीलदार भी शामिल थे। उन्होंने जमीन की सीमाओं की पहचान की और मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।

कई परिवारों और दुकानदारों ने बीएसएफ चौकी के पास वर्षों से मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बना रखे हैं। उनकी जमीन के मालिकाना हक की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके तहत स्थानीय लोगों और दुकानदारों से वैध भूमि-पट्टे और अन्य संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा गया। शुरुआती जांच में पता चला है कि कुछ कब्जाधारियों के पास मालिकाना हक के उचित दस्तावेज नहीं हो सकते हैं, जबकि कुछ निर्माण सरकारी जमीन पर होने की आशंका है।

दो नवंबर की घटना के बाद इस कवायद का खास महत्व है। इस घटना से सीमावर्ती इलाके की सुरक्षा स्थिति पर नए सिरे से ध्यान गया है। इसमें संभावित घुसपैठ, अनधिकृत बसावट, अवैध अतिक्रमण और कानून-व्यवस्था की समग्र स्थिति से जुड़ी चिंताएं भी शामिल हैं।

जिला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हटाने की पहल दो महीने से जारी है। सोनामुरा उपमंडल में 42 जगहों और बिशालगढ़ उपमंडल में एक जगह से अतिक्रमण हटाया गया। सत्यापन की प्रक्रिया जारी है और मालिकाना हक के दावों पर प्रशासन ने अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष या आधिकारिक फैसला नहीं किया है।

हमले के आरोप में आठ और गिरफ्तार

प्रेट्र के अनुसार त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में बीएसएफ जवानों पर हमले और उनमें से तीन को घायल करने के मामले में आठ और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 18 हो गई है।

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