सीएम योगी ने कहा कि संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। वाराणसी-विंध्य क्षेत्रीय विकास योजना भी जल्द लागू होगी। इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण में मुख्यमंत्री ने कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं और उद्यमियों से सीधा संवाद किया। उद्यमियों ने कालीन कारोबार की समस्याएं और उद्योग के विकास को लेकर अपने सुझाव मुख्यमंत्री के सामने रखे।
भदोही, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को भदोही जिले के नाम को लेकर बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भदोही जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। यह घोषणा भदोही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 112 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।
संत रविदास के नाम से जुड़ी जिले की नई पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में संत रविदास के सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध भदोही अब संत रविदास के नाम से जुड़ी नई पहचान के साथ जाना जाएगा।
भदोही का नाम इससे पहले भी कई बार बदला जा चुका है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 1994 में भदोही को वाराणसी से अलग कर जिला बनाया गया था। इसके बाद 1997 में इसका नाम संत रविदास नगर किया गया, 1999 में संत रविदास नगर-भदोही और 2014 में फिर भदोही नाम किया गया।
112 विकास परियोजनाओं की सौगात
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान जिले में 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं को जिले के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।
भदोही का कालीन उद्योग भी चर्चा में
भदोही देश-दुनिया में अपने कालीन उद्योग के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और कालीन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए बाजार, तकनीक और डिजाइन से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया।
MNT News अपडेट: मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब जिले की आधिकारिक प्रशासनिक पहचान और नाम परिवर्तन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।















