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2006 में बना स्कूल भवन अब बल्लियों के सहारे:बरामदे और कमरों में दरारें, बारिश में टपकती है छत; बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

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बस्ती जिले के विक्रमजोत शिक्षा क्षेत्र में पूरे हेमराज जूनियर विद्यालय का भवन अब बच्चों के लिए चिंता का कारण बन गया है। वर्ष 2006 में बना स्कूल भवन करीब दो दशक में ही जर्जर हालत में पहुंच गया है। बरामदों और कमरों की दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं। कई स्थानों पर भवन को लकड़ी की बल्लियों के सहारे खड़ा किया गया है। कमरों की छत में भी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। बारिश होने पर कई जगहों से पानी टपकने लगता है। ऐसे में जर्जर भवन में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 2006 में बना भवन, दो दशक में ही हो गया जर्जर पूरे हेमराज जूनियर विद्यालय का भवन वर्ष 2006 में बनकर तैयार हुआ था। अब यह भवन करीब 20 साल पुराना हो चुका है। समय के साथ रखरखाव के अभाव और लगातार बारिश के असर से भवन की हालत खराब होती चली गई। स्कूल के बरामदों और कमरों की दीवारों में कई जगह लंबी और चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। इससे भवन की स्थिति को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। दरारों वाले भवन को बल्लियों का सहारा भवन की जर्जर स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ हिस्सों को लकड़ी की बल्लियों के सहारे रखा गया है। स्कूल परिसर में भवन की हालत देखकर यह साफ नजर आता है कि इसकी तत्काल मरम्मत की जरूरत है। दरारों वाले कमरों और बरामदों में बच्चों की नियमित कक्षाएं चलने से किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। खासकर बारिश के मौसम में भवन को लेकर चिंता और बढ़ जाती है। छत में भी पड़ी दरारें, बारिश में टपकता है पानी विद्यालय के कमरों की छत में भी कई जगह दरारें दिखाई दे रही हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक के अनुसार, बारिश होने पर भवन के कई हिस्सों से पानी टपकने लगता है। पानी टपकने से कमरों में पढ़ाई प्रभावित होती है। साथ ही लगातार नमी रहने से भवन की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी रहती है। शिक्षकों को भी मौसम खराब होने पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। प्रभारी प्रधानाध्यापक बोले- विभाग को दे चुके हैं जानकारी विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मधुकर उपाध्याय ने बताया कि भवन की खराब हालत के बारे में विभागीय अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि स्कूल भवन अब काफी खस्ताहाल हो चुका है। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान कई जगह से पानी टपकने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में भवन की मरम्मत अथवा आवश्यक कार्रवाई जल्द होना जरूरी है, ताकि बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। तीन शिक्षक संभाल रहे बच्चों की पढ़ाई पूरे हेमराज जूनियर विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक मधुकर उपाध्याय के अलावा दो अन्य शिक्षक भी तैनात हैं। तीनों शिक्षक जर्जर भवन के बीच बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षकों के सामने एक तरफ बच्चों की शिक्षा सुचारु रखने की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर भवन की खराब स्थिति के कारण सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है। मरम्मत या नए भवन की जरूरत, कार्रवाई का इंतजार विद्यालय भवन में लगातार बढ़ती दरारों और बारिश में पानी टपकने की समस्या को देखते हुए अब इसकी मरम्मत या आवश्यकतानुसार नए भवन की जरूरत महसूस की जा रही है। लकड़ी की बल्लियों के सहारे भवन को चलाना स्थायी समाधान नहीं है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि विभाग जर्जर भवन का निरीक्षण कर जल्द आवश्यक कदम उठाएगा। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी हादसे का इंतजार किए बिना भवन की स्थिति सुधारने की कार्रवाई की जानी चाहिए।

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