श्रावस्ती के सिसवारा घाट पर राप्ती नदी का कटान तेजी से हो रहा है। नदी का तेज बहाव और बढ़ता जलस्तर सड़क के लिए खतरा बन गया है। पिछले दो दिनों में नदी का कटान सड़क के बिल्कुल करीब पहुंच गया है। सड़क का कुछ हिस्सा पहले ही नदी में समा चुका है। अगर कटान इसी रफ्तार से जारी रहा, तो सड़क का बचा हुआ हिस्सा भी नदी में बह सकता है। सड़क को बचाने के लिए मौके पर दिन-रात कटान रोकने का काम चल रहा है। मजदूर ईंट से भरी बोरियां नदी में डाल रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात में राप्ती नदी के तेज बहाव में कई बोरियां बह जाती हैं। इससे बचाव कार्य का उतना असर नहीं दिख रहा है, जितना होना चाहिए। सड़क के कटने से इलाके के हजारों लोगों के आने-जाने पर असर पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी के कटान को रोकने के लिए पक्की और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले ही कटान रोकने का काम कर लिया जाता, तो इस खतरे को टाला जा सकता था। फिलहाल, सिसवारा घाट पर सड़क को बचाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। लोगों की नजर अब प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी है। उनका कहना है कि अगर समय रहते मजबूत इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में सड़क का बड़ा हिस्सा नदी में बह सकता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो सकता है
राप्ती नदी के कटान से सिसवारा घाट पर सड़क बहने:दो दिन में सड़क के करीब पहुंचा कटान, ईंट की बोरियों से बचाव जारी
श्रावस्ती के सिसवारा घाट पर राप्ती नदी का कटान तेजी से हो रहा है। नदी का तेज बहाव और बढ़ता जलस्तर सड़क के लिए खतरा बन गया है। पिछले दो दिनों में नदी का कटान सड़क के बिल्कुल करीब पहुंच गया है। सड़क का कुछ हिस्सा पहले ही नदी में समा चुका है। अगर कटान इसी रफ्तार से जारी रहा, तो सड़क का बचा हुआ हिस्सा भी नदी में बह सकता है। सड़क को बचाने के लिए मौके पर दिन-रात कटान रोकने का काम चल रहा है। मजदूर ईंट से भरी बोरियां नदी में डाल रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात में राप्ती नदी के तेज बहाव में कई बोरियां बह जाती हैं। इससे बचाव कार्य का उतना असर नहीं दिख रहा है, जितना होना चाहिए। सड़क के कटने से इलाके के हजारों लोगों के आने-जाने पर असर पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी के कटान को रोकने के लिए पक्की और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले ही कटान रोकने का काम कर लिया जाता, तो इस खतरे को टाला जा सकता था। फिलहाल, सिसवारा घाट पर सड़क को बचाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। लोगों की नजर अब प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी है। उनका कहना है कि अगर समय रहते मजबूत इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में सड़क का बड़ा हिस्सा नदी में बह सकता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो सकता है































