Zero Tolerance पर भारी पड़ा रसूख! लगभग 4 साल से एक ही ब्लॉक में जमे हैं सचिव वेंकटेश्वर पटेल।
महराजगंज: उत्तर प्रदेश शासन की स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक पारदर्शिता के दावे महराजगंज जिले में किस प्रकार दम तोड़ रहे हैं, इसकी बानगी निचलौल विकास खंड में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

3 साल का नियम, लगभग 4 साल से जमावड़ा!
निचलौल के सचिव वेंकटेश्वर पटेल पर मेहरबान कौन?
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एक ही पटल या ब्लॉक में तैनात कर्मचारियों का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष (36 महीने) होना चाहिए, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म किया जा सके।
लेकिन इन तमाम नियमों को ठेंगा दिखाते हुए, पंचायत सचिव वेंकटेश्वर पटेल लगभग चार वर्षों से एक ही ब्लॉक—निचलौल—में जमे हुए हैं। इसे प्रशासनिक विसंगति कहें या किसी की विशेष कृपा, उनका यह कार्यकाल महराजगंज के प्रशासनिक गलियारों में सुचिता और कार्यकुशलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
नियमों का खुला उल्लंघन
सरकारी स्थानांतरण नीति के तहत 36 महीने (3 वर्ष) की समयसीमा पूरी होने के बावजूद एक ही ब्लॉक में सचिव का लंबे समय तक जमे रहना प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी:
जिला प्रशासन के जिम्मेदार और उच्चाधिकारियों (जैसे मुख्य विकास अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय) की इस मामले पर चुप्पी कई तरह की अटकलों और साठगांठ की ओर इशारा करती है।
संरक्षण के साये में कार्यप्रणाली
- आखिर इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर टिके रहने के पीछे कौन सा अदृश्य

संरक्षण काम कर रहा है? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या किसी सोची-समझी व्यवस्था का हिस्सा?
पारदर्शिता को पलीता
एक ही ब्लॉक में लंबे कार्यकाल से विकास कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता पर भी असर पड़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
जब नियम सबके लिए समान हैं, तो फिर निचलौल ब्लॉक के मामले में ये अपवाद क्यों और किसके इशारे पर बनाए जा रहे हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर पारदर्शी जांच और कार्रवाई करेंगे, या फिर यह फाइल भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगी?
नजरें अब जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या महराजगंज में ‘व्यवस्था’ नियमों के अधीन चलेगी या फिर अपवादों के साए में?























