रिपोर्ट:गजेंद्र कुमार गुप्त।
विशेष संवाददाता | महराजगंज
सत्ताधारी नेताओं की मजबूत पकड़ और पैसे की हनक के आगे यदि प्रशासनिक व्यवस्था नतमस्तक हो जाए, तो आम जनता का न्याय प्रणाली से विश्वास उठना स्वाभाविक है। जिस प्रशासनिक अमले पर गरीब और असहाय जनता न्याय के लिए भरोसा करती है, वही जब रसूखदारों के दबाव में घुटने टेक दे, तो कहावत चरितार्थ होती है-‘आप करें तो चमत्कार, हम करें तो…’। निचलौल ब्लॉक के करमहिया गांव में घटित हालिया प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि खादी के रसूख के आगे नौकरशाही किस कदर असहाय नजर आती है।
कागजों में बहती विकास की गंगा: बारिश में भी मजदूर करते रहे ‘काम’!
उल्लेखनीय है कि बीते 24 से 26 सितंबर के दौरान पूरे उत्तर प्रदेश में घनघोर बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त था। कई जिलों में रेड अलर्ट घोषित था और सरकार ने लोगों से बिना अति-आवश्यक कार्य के घरों से बाहर न निकलने की अपील की थी। जहां एक तरफ लोग छतों से टपकते पानी और जलभराव से जूझ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ करमहिया गांव में कागजों पर अद्भुत ‘चमत्कार’ हो रहा था। गांव के रोजगार सेवक नीलरतन कथित तौर पर कागजों में कई दर्जन मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर चकबंध कार्य (विकसित भारत जी राम जी योजना) करा रहे थे। जब ग्रामीणों को इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो उन्होंने इसका जमकर विरोध किया और भ्रष्टाचार की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई
*जांच के नाम पर महज ‘खानापूर्ति’, जांच स्थल पर उठे सवाल।*
जिलाधिकारी के निर्देश पर उपायुक्त श्रम एवं रोजगार गौरवेंद्र सिंह जांच करने करमहिया पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें ग्रामीणों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों की सीधी मांग थी कि जिस 24 से 26 सितंबर की मूसलाधार बारिश के दौरान काम होना दिखाया गया है, जांच अधिकारी उस स्थल की वस्तुस्थिति जांचें।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच अधिकारी ने उस बारिश वाले दिन के काम की पड़ताल करने के बजाय 7 अक्टूबर को चल रहे कार्यस्थल का निरीक्षण कर औपचारिकता पूरी कर ली।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यह निष्पक्ष जांच नहीं बल्कि ‘जांच के नाम पर खानापूर्ति’ थी, जिसका मकसद केवल जिम्मेदार तंत्र को बचाना था।
*दोहरे मापदंड: एक ही ब्लाक में दो कानून?*
इस पूरी कार्रवाई ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली के दोहरे मापदंडों की पोल खोलकर रख दी है।जहां
बड़हरा चरगहां में फर्जी हाजिरी का मामला मिलने पर जिम्मेदारों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की गई।तो वही करमहिया में मूसलाधार बारिश में कागजी हाजिरी लगाया गया।जांच के नाम पर लीपापोती और सभी जिम्मेदार बरी |
> बड़ा सवाल: जब पूरा प्रदेश और महराजगंज जिला बारिश से बेहाल था, तो क्या करमहिया गांव में अचानक कड़ाके की धूप खिल गई थी कि दर्जनों मजदूर फावड़ा चला रहे थे?
*किसके शह पर हो रही मेहरबानी?*
स्थानीय लोगों में आज भी इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि आखिर किस आका के इशारे पर करमहिया के दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को अभयदान दिया जा रहा है।जिस तरह से शिकायतों और जन-आक्रोश को दरकिनार कर फाइल बंद करने की कोशिश की गई, उसने यह साफ कर दिया है कि नौकरशाही अब जनसेवा के बजाय रसूखदारों की जी-हुजूरी में अधिक व्यस्त है।अब देखना यह होगा कि क्या जिलाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराएंगे या फिर खादी के आगे नौकरशाही की कलम इसी तरह नतमस्तक रहेगी।
















