रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने राज्य के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों (रजिस्ट्रार) के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक स्तर के सुधार, छात्र नामांकन दर, रिक्त पदों पर बहाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के क्रियान्वयन, नवाचार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता जैसे अहम मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
रिक्त पदों पर त्वरित भर्ती और स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पड़े शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों का विस्तृत ब्योरा लेते हुए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत स्थानीय योग्य एवं प्रतिभाशाली युवाओं को प्राथमिकता दी जाए, जिससे क्षेत्रीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें। इसके साथ ही उन्होंने नैक (NAAC) और एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग में सुधार के लिए सभी संस्थानों को एक स्पष्ट और परिणामोन्मुख रोडमैप तैयार करने को कहा।
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने पर जोर देते हुए राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने को कहा। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों के व्यावहारिक अनुभव का लाभ विद्यार्थियों को मिल सके। साथ ही, स्वीकृत सीटों के अनुपात में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा।
गांवों को गोद लेकर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा
सामाजिक सरोकार और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नजदीकी गांवों को गोद लेने के निर्देश दिए:
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ग्रामीण विकास में योगदान: विश्वविद्यालयों के ज्ञान, शोध और संसाधनों का लाभ ग्रामीण अंचलों तक पहुंचे।
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स्टार्टअप और उद्यमिता: विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए इनोवेशन और उद्यमिता से जुड़ें।
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युवा अभियान और खेल: 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत' संकल्प अभियान में छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए और उन्हें खेलों के प्रति प्रोत्साहित किया जाए।
पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और अनिवार्य इंटरनल ऑडिट
परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए राज्यपाल ने परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाने पर विशेष बल दिया। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों में अधिकृत परीक्षा नियंत्रकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने और आंतरिक ऑडिट के लिए अनिवार्य रूप से इंटरनल कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, आयुष विश्वविद्यालय के अधीन चल रहे निजी मेडिकल कॉलेजों के मानकों और नियमों के कड़ाई से पालन की निगरानी करने को भी कहा गया।
बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. सिद्धार्थ कोमल परदेशी, उच्च शिक्षा सचिव अविनाश चंपावत, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त रितेश अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विश्वविद्यालयों के कुलसचिव उपस्थित रहे।






























