
बारिश के बाद बढ़ी उमस, जलभराव और तापमान में उतार-चढ़ाव का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सिसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की ओपीडी में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, जुकाम, उल्टी-दस्त, डायरिया, पेट संबंधी संक्रमण और त्वचा रोगों के मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। ओपीडी में तैनात डॉ. जितेंद्र पटेल ने बताया कि बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। इससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने यह भी बताया कि दूषित पानी और खान-पान में लापरवाही से टाइफाइड, पेचिश, फूड पॉइजनिंग और हेपेटाइटिस-ए/ई जैसे संक्रमण फैल सकते हैं। बारिश के मौसम में आंखों के संक्रमण और फंगल इंफेक्शन के मामले भी सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, सितंबर माह में भी मौसम में बदलाव के कारण मौसमी बीमारियों का प्रभाव बना रह सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें और व्यक्तिगत तथा सार्वजनिक साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। इसके अतिरिक्त, स्वच्छ या उबला हुआ पानी पीने और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करने की भी सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, शरीर में अत्यधिक दर्द, कमजोरी या किसी अन्य गंभीर लक्षण के दिखने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के स्वयं दवा न लें। ऐसे मामलों में तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं और उचित उपचार प्राप्त करें।























