
गांव में इन दिनों श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भक्ति का माहौल है। ग्रामीणों में खासा उत्साह दिख रहा है। इसी कड़ी में एक नन्हे बच्चे को भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में सजाया गया। पीले रंग की पोशाक में सजे नन्हे कान्हा बेहद मनमोहक लग रहे थे। उनके सिर पर सुंदर मुकुट और माथे पर तिलक था। गले में मोतियों की माला और आभूषणों ने उनके रूप को और आकर्षक बना दिया। हाथों में माखन का पात्र भी सजा था, जो कृष्ण लीला की याद दिला रहा था। बाल कृष्ण के इस मनमोहक रूप को देखकर परिवार के लोग खुश हुए। परिजनों के चेहरे पर मुस्कान थी। ग्रामीणों ने भी नन्हे कान्हा के इस रूप की खूब तारीफ की। कई लोगों ने बाल कृष्ण की तस्वीरें अपने मोबाइल में कैद कीं। गांव के लोगों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप सभी को अपनी ओर खींचता है। नन्हे बच्चे के चेहरे की मासूमियत ने इस धार्मिक आयोजन को और सुंदर बना दिया। श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप भारतीय संस्कृति और परंपराओं में खास महत्व रखता है। भगवान कृष्ण को प्रेम, दया, बुद्धिमत्ता और धर्म का प्रतीक मानते हैं। उनकी बाल लीलाओं का जिक्र धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। माखन चोरी से लेकर ग्वाल-बालों के साथ उनकी कई लीलाएं भक्तों के बीच मशहूर हैं। इसी वजह से जन्माष्टमी पर बच्चों को कृष्ण के रूप में सजाने की परंपरा कई जगह दिखती है। गांव में भी इस परंपरा को लेकर लोगों में उत्साह है। बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी हो रही है। गांव के मंदिरों में भी खास पूजा-अर्चना की तैयारियां चल रही हैं। कहीं भजन-कीर्तन की तैयारी है तो कहीं कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी सजाई जा रही है। महिलाएं भी इन धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर उत्साहित हैं































